अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के हजारों छात्र मशहूर डल झील के किनारे एक ऐतिहासिक पांच किमी रीडिंग मैराथन में हिस्सा लेने के लिए इकट्ठा हुए। नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया नेयह मैराथन चिनार बुक फेस्टिवल 2026 और शिक्षा सप्ताह के हिस्से के तौर पर आयोजित की थी।
पढ़ाई और पर्यावरण को बढ़ावा देने को आयोजित इस मैराथन ने भाग लेने वाले सबसे ज्यादा बच्चे श्रेणी में ''''''''एशिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स'''''''' और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स दोनों में आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड दर्ज कराया। इस दौड़ में रिकॉर्ड 4,644 बच्चों ने हिस्सा लिया।
फिटनेस, साहित्य और सस्टेनेबिलिटी (पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली) का मेल बिठाते हुए, इस पहल का मकसद युवाओं में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना और साथ ही पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना था। इस कार्यक्रम की शुरुआत जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने की। उपराज्यपाल ने इस पहल को ज्ञान, फिटनेस और प्रकृति के प्रति ज़िम्मेदारी का एक अनोखा उत्सव बताया।लोगों का स्वागत करते हुए, चिनार बुक फेस्टिवल के मुख्य संयोजक डॉ. अमित वांचू ने रीडिंग मैराथन को एक अनोखी पहल बताया। सभा को संबोधित करते हुए, बिस्लेरी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ डॉ. एंजेलो जॉर्ज ने नेशनल बुक ट्रस्ट की तारीफ़ की कि उन्होंने एक ऐसा अनोखा मंच बनाया है जो किताबों को पर्यावरण के प्रति जागरूकता से जोड़ता है। इस समारोह में ''''''''शिकाराथन'''''''' के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। तनवीर अहमद भट ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि मुजफ़्फर अहमद और मंजूर अहमद उसके बाद रहे। इस मौके पर श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर अक्षय लाब्रू, श्रीनगर के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस जीवी संदीप चक्रवर्ती, चिनार बुक फेस्टिवल के मुख्य संयोजक डॉ. अमित वांचू, और बिस्लेरी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ डॉ. एंजेलो जॉर्ज भी मौजूद थे।
विजेताओं को किया सम्मानित
5के रीडिंग मैराथन के विजेताओं को लड़कों और लड़कियों, दोनों कैटेगरी में सम्मानित किया गया। लड़कियों की कैटेगरी में, कोठीबाग के गवर्नमेंट गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल की मंशा जहरा ने पहला स्थान हासिल किया। लड़कों की कैटेगरी मेंहजरतबल के बॉयज़ हायर सेकेंडरी स्कूल के मुसैब शब्बीर भट ने पहला स्थान हासिल किया। युवा चैंपियन अज़हर अब्बास और फ़ज़िल अब्बास को भी विशेष सम्मान दिया गया।
थ्रेड्स ऑफ हेरिटेज में युवाओं ने दिखाई कला
''''''''ऑथर्स कॉर्नर'''''''' में, कायनात भट्ट के संचालन में ''''''''थ्रेड्स ऑफ हेरिटेज: फैशन एंड क्राफ़्ट्स रिवाइवल'''''''' सेशन हुआ। इसमें मीरा अली, आमना असद और सलीम बेग ने भारत की पारंपरिक कलाओं को बचाने और आज के बाज़ार में उनकी अहमियत बनाए रखने पर चर्चा की। पैनल ने कलाओं को जीवित सांस्कृतिक विरासत के तौर पर बचाने की जरूरत पर ज़ोर दिया। आमना असद ने क्वालिटी, कारीगरों के सशक्तिकरण और युवा पीढ़ी के अपनी जड़ों से जुड़े रहने की जरूरत पर बात की। सलीम बेग ने हस्तशिल्प को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की अभिव्यक्ति बताया और मानवीय स्तर पर उत्पादन, कारीगरों की गरिमा और हाथ से बनी चीज़ों के पीछे लगने वाले समय, हुनर और सांस्कृतिक महत्व के बारे में ग्राहकों को जागरूक करने की जरूरत पर ज़ोर दिया। मीरा अली ने लखनऊ की चिकनकारी और ज़रदोज़ी परंपराओं को फिर से जीवित करने के अपने काम के अनुभव साझा किए।
अनुभव-आधारित यात्रा की ओर बढ़ें
''''''''बियॉन्ड द पोस्टकार्ड: रीडिफाइनिंग टूरिज़्म थ्रू लिटरेचर, बुक्स, माइस एंड डिजिटल इनोवेशन'''''''' सेशन का संचालन डॉ. अमित वांचू ने किया। इसमें सुनील वट्टल, सम्रांत विरमानी, शब्बीर हुसैन भट, शाहनवाज शाह और नासिर अली खान जैसे वक्ता शामिल हुए। पैनल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को पारंपरिक पिकनिक वाली सैर-सपाटे से हटकर तेज़ी से हाई-वैल्यू, अनुभव-आधारित यात्रा की ओर बढ़ना चाहिए। चर्चा में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि कैसे साहित्यिक रचनाएं यात्रियों को वहां पहुंचने से पहले ही सांस्कृतिक कहानियों के जरिए किसी जगह का दो बार अनुभव करने का मौका देती हैं।
हेल्थकेयर को बेहतर बनाने पर चर्चा की
''''''''सबके लिए स्वास्थ्य : जम्मू-कश्मीर में देखभाल के भविष्य को आकार देना'''''''' विषय पर हुए एक और सेशन में पैरास हॉस्पिटल और जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख मेडिकल एक्सपर्ट्स और अधिकारी एक साथ आए ताकि घाटी में हेल्थकेयर को बेहतर बनाने पर चर्चा की जा सके। ''''''''भाषा, साहित्य और विरासत: घाटी के शब्द'''''''' सेशन में एसके भान, डॉ. शाइस्ता, प्रो. शाद रमज़ान, एजाज़ मोहम्मद शेख और डॉ. सतीश विमल शामिल हुए। इसे जीएन शाकिर ने मॉडरेट किया। उन्होंने कश्मीर की समृद्ध साहित्यिक परंपराओं, इसकी विविध भाषाओं के संरक्षण और घाटी की सांस्कृतिक विरासत को बचाने में साहित्य की अहम भूमिका पर बात की।
कठपुतली कहानी सेशन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल हुए बच्चे
''''''''चिल्ड्रन कॉर्नर'''''''' में कहानी सुनाने, क्रिएटिविटी और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के सेशन में 2,200 से ज़्यादा स्टूडेंट्स का स्वागत किया गया। इस प्रोग्राम में शालिनी बंसल का कठपुतली कहानी सेशन, मलेहा लाइक़ की आर्ट एंड क्राफ्ट वर्कशॉप और अलग-अलग स्कूलों के स्टूडेंट्स के शानदार कश्मीरी लोक नृत्य और म्यूज़िकल परफॉर्मेंस शामिल थे। इनमें नूर बाग के विज़डम पब्लिक स्कूल का म्यूज़िकल ड्रामा रो ऊ क्या, प्रो ऊ क्या – हमने क्या खोया, हमने क्या पाया भी शामिल था, जिसे जहांगीर पराश ने डायरेक्ट किया था। हिस्सा लेने वाले स्टूडेंट्स को उनकी परफॉर्मेंस के लिए प्रतीक चिह्न, सर्टिफिकेट और किताबें देकर सम्मानित किया गया।