नए नियमों के तहत निजी विश्वविद्यालयों में दाखिले और रोजगार के अवसरों में जम्मू-कश्मीर के मूल निवासियों (डोमिसाइल) के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। साथ ही संस्थानों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नियामक व्यवस्था भी तय की गई है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शिक्षा मंत्री शमीम फिरदौस को इन नियमों की अधिसूचना जारी होने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों से शैक्षणिक संस्थानों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए शिक्षा तथा रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। इससे शिक्षण, शोध और नवाचार के क्षेत्र में भी बेहतर काम हो सकेगा।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में ही विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें बेहतर पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े। नए नियमों से विज्ञान एवं तकनीक (एसटीईएम), चिकित्सा, कानून, बिजनेस स्टडीज और लिबरल आर्ट्स जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित करने को प्रोत्साहन मिलेगा। इस पहल से जम्मू-कश्मीर को उच्च शिक्षा और शोध के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।