उन्होंने बताया कि शुरू में जो मामला सीधा-सादा ड्रग तस्करी का लग रहा था उसने जल्द ही नाटकीय मोड़ ले लिया। आगे की जांच में पता चला कि मंजूर अहमद को वित्तीय विवाद के चलते पांच लोगों के एक समूह ने जानबूझकर फंसाया था। प्रवक्ता ने बताया कि नटिपोरा के तौहीद कॉलोनी निवासी मोहम्मद शफी बदयारी ने झूठे बहाने से मंजूर अहमद की गाड़ी मांगी थी।
सफाकदल के तौफीक अली और नटिपोरा के पंपोश कॉलोनी के अर्शीद अहमद वानी के साथ मिलकर मोहम्मद शफी ने गाड़ी को नटिपोरा पहुंचाया जहां उन्होंने उसमें प्रतिबंधित सामान रख दिया। फिर जाल बिछाकर गाड़ी को करण नगर में मंजूर अहमद को लौटा दिया गया। इसके बाद मोहम्मद शफी ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता को सूचना दी जिसने पुलिस को सूचित किया और बाद की घटनाओं की श्रृंखला शुरू हुई और मंजूर अहमद की गलत तरीके से गिरफ्तारी हुई।
उन्होंने बताया कि जांच में यह भी पता चला कि साजिश कई महीनों से चल रही थी। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि अपराध के पीछे का मकसद हैदरपोरा में एक जमीन का सौदा था जहां मंजूर अहमद ने संपत्ति खरीदने के लिए समूह को पैसे दिए थे। लेन-देन पूरा करने के बजाय साजिशकर्ताओं ने उसे साइड करने और उसके पैसे हड़पने के लिए ड्रग-प्लांटिंग की योजना बनाई।
साजिश में इस्तेमाल किया गया प्रतिबंधित सामान जहूर अहमद मीर के जरिए कई महीने पहले खरीदा गया था और श्रीनगर के रामबाग में रौफ अहमद मीर की दुकान पर रखा गया था। उन्होंने बताया कि 26 फरवरी, 2025 को पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जिनकी पहचान मोहम्मद शफी बदयारी, अर्शीद अहमद वानी, तौफीक अली और रौफ अहमद मीर के तौर पर हुई।प्रवक्ता ने बताया कि उनसे पूछताछ के दौरान प्रतिबंधित सामान की और बरामदगी की गई जिससे मामला मजबूत हुआ।
उन्होंने बताया कि पुलिस जहूर अहमद मीर की सक्रिय रूप से तलाश कर रही है जो अभी भी फरार है। इसके अतिरिक्त, मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं को लागू किया गया है और पुलिस ने संकेत दिया है कि जांच आगे बढ़ने पर और गिरफ्तारियां होने की उम्मीद है।