श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में उमर ने कहा कि कांग्रेस अपनी सफाई दे चुकी है। वीडियो में स्पष्ट है कि वंदे मातरम के तीनों छंद गाए गए। ऐसे में विवाद की कोई वजह नहीं है। चूंकि इसे पहली बार सरकारी कार्यक्रमों में शामिल किया गया है, इसलिए सभी को नए प्रोटोकॉल के अनुरूप ढलने में कुछ समय लगेगा।
उमर ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के तौर पर यह उनकी आठवीं स्वतंत्रता दिवस परेड थी, लेकिन पहली बार इसमें वंदे मातरम को शामिल किया गया। उन्हें भी नए क्रम को समझने में थोड़ा समय लगा कि पहले खड़ा होना है, फिर वंदे मातरम होगा, उसके बाद ध्वजारोहण और फिर राष्ट्रगान। शायद कांग्रेस को भी नए प्रोटोकॉल के साथ सामंजस्य बैठाने में समय लगा हो और यह स्वाभाविक है।
महबूबा के बयान पर टिप्पणी से किया इन्कार
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की ओर से अनुच्छेद 370 की बहाली का समर्थन करने पर खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने संबंधी सोशल मीडिया पोस्ट पर उमर ने टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह महबूबा का एक्स अकाउंट है, जिसे उनकी बेटी संचालित करती हैं और वे अपनी इच्छा के अनुसार पोस्ट करने के लिए स्वतंत्र हैं।
झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर कहा कि उनकी मांगों में जरूर कुछ सच्चाई होगी, तभी राज्य सरकार ने उनसे पहले दौर की बातचीत की है। यदि मांगें जायज हैं तो बातचीत के जरिए उनका समाधान निकाला जाना चाहिए।
राज्यों को उनके अधिकार मिलने चाहिए
शक्तियों के विकेंद्रीकरण पर सीएम ने कहा, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे विषय राज्यों के अधिकार में आते हैं। कहा,राज्यों को कमजोर करने के लिए भाजपा ही जिम्मेदार नहीं है। पिछली कांग्रेस व यूपीए सरकारों ने भी केंद्रीय एजेंसियों को जरूरत से ज्यादा शक्तियां दी थीं। नीट जैसी परीक्षाओं के केंद्रीकरण पर कहा,यदि इन परीक्षाओं का केंद्रीकरण नहीं किया गया होता तो केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना पड़ता। उनके अनुसार, परीक्षाएं राज्य स्तर पर होतीं और वहां कोई चूक होती तो संबंधित राज्य का मंत्री जिम्मेदार होता। सब कुछ केंद्र के हाथ में लेने से जवाबदेही की समस्या पैदा होती है। जो विषय राज्यों के हैं, उन्हें राज्यों के पास ही रहना चाहिए और केंद्र के विषय केंद्र को संभालने चाहिए।