सूरज ने बताया कि इतनी ऊंचाई पर दौड़ना बेहद चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी से सांस लेने में परेशानी होती है। उन्होंने इसके लिए लद्दाख में करीब एक महीने तक प्रशिक्षण लिया और दौड़ के दौरान रन-वॉक रणनीति अपनाई। 40 किलोमीटर तक वह बढ़त बनाए हुए थे, लेकिन उसके बाद ऊंचाई बढ़ने के कारण रफ्तार बनाए रखना मुश्किल हो गया।
यह सूरज की लद्दाख मैराथन में तीसरी भागीदारी थी। उन्होंने 2022 में फुल मैराथन में हिस्सा लिया था, जबकि पिछले साल खारदुंग ला चैलेंज रेस में दौड़े थे।
सूरज का लद्दाख से जुड़ाव सिर्फ मैराथन तक सीमित नहीं है। उन्होंने 2024 में जयपुर से साइकिल चलाकर मनाली के रास्ते करीब 2,400 किलोमीटर का सफर 12 दिनों में तय कर लद्दाख पहुंचकर मैराथन में हिस्सा लिया था। इसके बाद उन्होंने कश्मीर के रास्ते लद्दाख से जयपुर तक करीब 1,500 किलोमीटर की साइकिल यात्रा भी 12 दिनों में पूरी की।