विभागीय जांच में जीएमसी अनंतनाग के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सैयद मकबूल पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर मरीजों के शोषण और फर्जी बीमा दावों के आरोप लगाए गए हैं। मामला 103 मरीजों में पेसमेकर प्रत्यारोपण से जुड़ा है।
जांच के दौरान 55 संदिग्ध मामलों की विशेषज्ञ समीक्षा कराई गई जिसमें 27 मरीजों के हृदय सामान्य पाए गए। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि इन मरीजों पर लेफ्ट बंडल ब्रांच एरिया पेसिंग (एलबीबीएपी) प्रक्रिया करने का कोई चिकित्सीय आधार नहीं था।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डॉ. मकबूल ने पीएम-जय और सेहत योजना के तहत 103 मामलों को ड्यूल चैंबर पेसमेकर प्रत्यारोपण के रूप में दर्ज कर वित्तीय दावा किया, जबकि वास्तविकता में मरीजों पर अलग प्रक्रिया की गई थी। विभाग का आरोप है कि यह सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के धन का दुरुपयोग करने के उद्देश्य से किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मरीजों से नकद राशि वसूली गई जबकि पीएम-जय और सेहत योजना के तहत उपचार पूरी तरह निशुल्क होना चाहिए था। एक मामले में मरीज से 70 हजार रुपये एक निजी कंपनी को भुगतान करवाने का आरोप लगाया गया है।
विभाग ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने अस्पताल की निर्धारित खरीद प्रक्रिया को नजरअंदाज कर निजी विक्रेताओं के साथ मिलकर चिकित्सा उपकरण मंगवाए। जांच के दौरान कई खरीद रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे साक्ष्य छिपाने की आशंका जताई गई है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब दिसंबर 2025 में राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने एलबीबीएपी से जुड़े दावों में असामान्य बढ़ोतरी देखी। इसके बाद राज्य एंटी फ्रॉड यूनिट ने जीएमसी अनंतनाग में अचानक जांच की और कई अनियमितताओं का पता लगाया।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने डॉ. मकबूल को एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी। विभाग ने इसे गंभीर चिकित्सीय लापरवाही, पद के दुरुपयोग और सरकारी सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन माना है।