हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक को शुक्रवार को उनके घर के बाहर तैनात पुलिसकर्मियों ने जामा मस्जिद जाने से रोक दिया। पुलिस ने इसके लिए सुरक्षा का हवाला दिया है। वहीं मीरवाइज ने कहा कि मुझे मेरे मजहबी अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। अगर मैं आजाद शहरी हूं तो यह बंदिशें क्यों।
जुमे की नमाज के लिए जब मीरवाइज निगीन स्थित घर से निकलने लगे तो पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में वहां तैनात जवानों ने उन्हें बाहर निकलने नहीं दिया। इसका एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह पुलिस से यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि जो बयान आया है वो प्रदेश के सबसे ऊंचे पद पर तैनात उप राज्यपाल का है।
उन्होंने कहा कि आज लोग तीन साल बाद उन्हें सुनने के लिए इंतजार कर रहे हैं। जुमे की नमाज पढ़ने और दुआ करने से तो नहीं रोका जाए।अंजुमन औकाफ जामा मस्जिद श्रीनगर की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि मीरवाइज उमर फारूक शुक्रवार जब अपने आवास से बाहर निकले तो गेट के बाहर मौजूद सुरक्षाबलों ने उन्हें रोक दिया।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों को भी मीरवाइज से मिलने नहीं दिया गया है। तीन साल बाद उमर फारूक को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए थे, लेकिन ऐसा न होने पर लोगों ने आक्रोश जाहिर किया। अंजुमन औकाफ ने उन्हें अनुमति नहीं दिए जाने को अजीब बताया है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के बयान को समझने में वे असमर्थ हैं, जिन्होंने पिछले हफ्ते मीडिया के साथ एक साक्षात्कार में दावा किया था कि मीरवाइज न तो हिरासत में हैं और न ही उन पर कोई प्रतिबंध लगाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी संसद में दो बार इसी तरह के बयान दिए हैं। हालांकि ये दावे हकीकत से कोसों दूर हैं।
प्रदर्शन कर रिहाई की मांग की
जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ी गई और भारी संख्या में लोग इसमें शामिल हुए। वहीं इस बीच एक वीडियो सामने आया, जिसमें लोगों ने मीरवाइज मौलवी उमर फारूक की तस्वीरें हाथ में लिए एक अनोखा शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर उनकी रिहाई की मांग की।