कश्मीर घाटी में वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के कारण और फिर वर्ष 2020 में कोरोना के चलते लॉकडाउन के कारण काफी नुकसान पर्यटन क्षेत्र को उठाना पड़ा था। इसके बाद आई कोरोना की दूसरी लहर ने पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का काफी नुकसान पहुंचाया है।
कोरोना महामारी के कारण जम्मू-कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र में पर्यटकों की भारी गिरावट आई है। प्रदेश की जीडीपी में करीब सात प्रतिशत पर्यटन क्षेत्र का योगदान है। लाखों लोगों का रोजगार पर्यटन के भरोसे ही चलता है।
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ट्रेवल एजेंट्स सोसाइटी ऑफ कश्मीर (टास्क) के अनुसार कोविड-19 के चलते करीब 5 से 10 प्रतिशत ही पर्यटक यहां का रुख कर रहे हैं। करीब 100 प्रतिशत एडवांस बुकिंग थी वह कैंसिल हो चुकी है। श्रीनगर में विश्व प्रसिद्ध डल झील और उसके आस पास दबरवन पहाड़ियों के दामन तले स्थित ट्यूलिप गार्डन और अन्य मुगल गार्डन इस समय सुनसान और वीरान पड़े हैं।
जनवरी 2019 से दिसंबर 2020 तक करीब 1500 करोड़ का नुकसान केवल पर्यटन क्षेत्र को उठाना पड़ा था। लेकिन उसके बाद दिसंबर 2020 से मार्च 2021 तक कश्मीर में बहुत अच्छा सीजन गया और यहां के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने बहुत अच्छा काम किया जोकि चल रहा था। लेकिन अचानक से कोरोना की दूसरी लहर की गाज फिर से यहां के पर्यटन क्षेत्र पर आ गिरी।
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20 हजार की जगह सिर्फ 25 सौ ही पर्यटक आ रहे ट्यूलिप गार्डन
ट्यूलिप गार्डन के इंचार्ज ने बताया कि यहां पर रोजाना 20 हजार पर्यटक और स्थानीय लोग ट्यूलिप के नजारे लेने आते थे, लेकिन यह संख्या इस समय औसतन 2500 तक गिर चुकी है। इसमें भी 70 प्रतिशत स्थानीय लोग हैं जो यहां आते हैं। वहीं टास्क के सचिव अथर यामीन ने बताया कि सबकुछ अच्छा चल रहा था।
25 अप्रैल तक यहां के करीब सभी होटल बुक चल रहे थे, जबकि कुछ हाई-एंड केटेगरी के होटल हैं, वो मई के अंत तक बुक थे। लेकिन अचानक से कोरोना के बढ़ते मामलों ने सब कुछ बिगाड़ दिया। जून तक करीब 100 प्रतिशत बुकिंग कैंसिल हो चुकी है। अभी केवल 5 से 10 प्रतिशत ऐसे पर्यटक हैं जो यहां आ रहे हैं।