याचिका में केंद्र सरकार, लद्दाख प्रशासन, लेह के डिप्टी कमिश्नर और जोधपुर जेल अधीक्षक को पक्षकार बनाया गया है। इसमें मांग की गई है कि वांगचुक को कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए, उन्हें परिवार और वकील से मिलने की अनुमति दी जाए, और उन्हें दवाइयां, कपड़े और अन्य जरूरी सामान मुहैया कराए जाएं।
गीतांजलि अंगमो ने आरोप लगाया कि उन्हें खुद भी लेह में नजरबंद कर दिया गया है, और वांगचुक द्वारा स्थापित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (एचआईएएल) के छात्रों और स्टाफ को परेशान और डराया-धमकाया जा रहा है।
याचिका में यह भी बताया गया कि वांगचुक को उनके उपवास के बाद की कमजोरी के बावजूद बिना दवा और जरूरी सामान दिए जोधपुर भेजा गया, और अभी तक गिरफ्तारी के कारणों की कोई जानकारी उन्हें या परिवार को नहीं दी गई है।
याचिका में यह गंभीर आरोप भी लगाया गया है कि वांगचुक की गिरफ्तारी से लद्दाख में मानसिक तनाव का माहौल बन गया है, और हाल ही में एक बौद्ध संघ के सदस्य ने कथित तौर पर इसी वजह से आत्महत्या कर ली।