इस घटना के बाद राजनीतिक दलों और संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
नेशनल कॉन्फ्रेंस पीडीपी और माकपा ने इस कदम को भड़काऊ और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया और वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन दरख्शां अंद्राबी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वक्फ बोर्ड को अपनी गलती मानते हुए माफी मांगनी चाहिए थी।
सरकारी प्रतीक चिह्न धार्मिक स्थलों में इस्तेमाल नहीं होते। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या दरगाह ये सरकारी संस्थान नहीं हैं।
वहीं, बीजेपी ने इस तोड़फोड़ की घटना की निंदा करते हुए इसे आतंकवाद और अलगाववाद को दोबारा उकसाने की कोशिश बताया।
इस बीच, दरख्शां अंद्राबी ने उन लोगों को 'गुंडा' कहकर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की, यहां तक कि सख्त सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत केस दर्ज करने की बात भी कही। इस पर उमर अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी कि पहले तो माफी मांगनी चाहिए थी, अब धमकियों का सहारा लिया जा रहा है। वक्फ बोर्ड ने जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और जांच जारी है।
संबंधित वीडियो