दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले का बुरहान हमजा पाकिस्तान जाकर किताबों के बजाय बंदूक थाम बैठा। अन्य आतंकी कमांडरों की तरह हमजा ने भी कश्मीरी मासूम युवाओं को बरगलाया और उन्हें आतंक की राह पर धकेल दिया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार वह पाकिस्तान से ही कश्मीर में प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-बद्र की जड़ें मजबूत करने में लगा था। उसे कश्मीरी युवाओं को अल-बद्र में शामिल होने का जिम्मा सौंपा गया था।
रिपोर्टों के अनुसार हमजा को पाक अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद के पास एक घने जंगली इलाके में अज्ञात हमलावरों ने निशाना बनाया। हमलावरों ने उस पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वह पिछले कई साल से पीओके में एक स्कूल टीचर की फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। इसी आड़ में वह आतंकी ट्रेनिंग कैंप और घुसपैठ के नेटवर्क चला रहा था। केंद्र सरकार ने 19 अप्रैल, 2022 को उसे यूएपीए के तहत आतंकी घोषित किया था।
पिता बोले- जिसने गलत रास्ता अपनाया वो मारा गया
पुलवामा जिले के हमजा के पिता गुलजार अहमद डार ने कहा कि उसके जिस बेटे ने गलत रास्ता अपनाया, वह मारा गया है। अब उसकी सजा परिवार के सदस्यों को न दी जाए। उन्होंने एलजी प्रशासन से अपील की कि अगर हमजा के कारण बड़ा बेटा शाहिद जेल में बंद है तो उसे रिहा किया जाए।
बड़ा भाई जेल में है बंद :
गुलजार ने बताया कि हमजा के पाकिस्तान जाने के बाद मेरे बड़े बेटे शाहिद गुलजार (2019 बैच केएएस क्वालीफाई) को 2022 में गिरफ्तार कर लिया गया। वह पांच वर्षों से जम्मू जेल में बंद है। दूसरा बेटा आरिफ गुलजार जो पीएचडी और नेट क्वालीफाई किया है। उसे रिसर्च के लिए रूस जाना था, लेकिन उसका पासपोर्ट जब्त किया गया है।