कंगन के लोगों ने लगाया उपेक्षा का आरोप, फिर से आबाद करने की मांग
गांदरबल। कभी जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और शेख अब्दुल्ला जैसे राष्ट्रीय नेताओं की मेजबानी करने वाला कश्मीर के गांदरबल जिले के कंगन इलाके का ऐतिहासिक प्रांग पार्क आज पूरी तरह खंडहर बन चुका है। स्थानीय लोग लगातार सरकारों पर इस धरोहर को उपेक्षित करने का आरोप लगा रहे हैं जो कभी राजनीतिक महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक था।
चित्रकूट, प्रांग और आसपास के इलाकों के लोग पार्क की बदहाली पर गहरा दुख जता रहे हैं। उनका कहना है कि जिस जगह पर ऐतिहासिक राजनीतिक सभाएं और बड़े नेताओं का आना-जाना होता था, वह आज कचरा डंपिंग ग्राउंड बन गया है। टूटे हुए ढांचे, जंगली झाड़ियां और गहरे गड्ढों ने पार्क को निगल लिया है।
स्थानीय निवासी चौधरी अत्ता मोहम्मद कमर ने कहा कि यह पार्क कभी ऐतिहासिक चर्चाओं का केंद्र रहा है। प्रधानमंत्री नेहरू, इंदिरा गांधी, शेख अब्दुल्ला और देश के बड़े-बड़े दिग्गज यहां आते थे। जम्मू-कश्मीर और देश के बड़े फैसले यहीं लिए जाते थे। लेकिन आज यह पार्क खुद इतिहास बनकर रह गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसकी विरासत के बावजूद दशकों से यहां कोई विकास कार्य नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि हजरतबल दरगाह को ध्यान देकर खूबसूरती से बहाल किया गया, वैसे ही यह ऐतिहासिक पार्क 1947 से उपेक्षित पड़ा है। अगर इसे पुनर्जीवित किया जाए तो सोनमर्ग से गांदरबल तक के युवाओं के लिए रोजगार और नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
एक अन्य युवक ने बताया कि 1980 के दशक तक प्रांग पर्यटकों से गुलजार रहता था। उन्होंने कहा, सैलानी, परिवार, स्कूली बच्चे सब यहां आते थे। 1990 के दशक की उथल-पुथल में पार्क क्षतिग्रस्त हो गया और कभी मरम्मत नहीं हुई। यहां दुकानदार और मजदूरों का रोजगार छिन गया। हम कंगन के विधायक मियां मेहर अली साहब से अपील करते हैं कि इस पार्क का तुरंत नवीनीकरण करवाएं।
लोगों का कहना है कि कभी जंगल की कुटियाओं, नदी किनारे की खूबसूरती और पिकनिक स्पॉट के लिए मशहूर यह इलाका अब सड़ांध में डूबा है। कुछ हिस्सों पर कब्जे भी हो गए हैं। बुजुर्ग सईद जमान शाह ने कहा, 70-80 के दशक में प्रांग पार्क कश्मीर के सबसे बेहतरीन पार्कों में शुमार था, गुलमर्ग के बाद नंबर दो पर। आज यह 20 फीट गहरी उपेक्षा में दबा है। हमारे बच्चे बेरोजगार हैं, गुरेज, तुलैल, जंस्कार और कारगिल काम की तलाश में भटक रहे हैं।
उन्होंने सरकार से अपील की है कि अगर चाहें तो हजारों सैलानी फिर यहां खींचे जा सकते हैं। उन्होंने कहा, लेकिन लगता है किसी को काम करने की इच्छा ही नहीं है। हम विधायक मेहर अली से व्यक्तिगत रूप से यहां आने और देखने की गुजारिश करते हैं।
पूर्व विधायक और वर्तमान सांसद मियां अल्ताफ अहमद से जब इस मुद्दे पर पूछा गया तो उन्होंने माना कि प्रांग पार्क बहुत अच्छा पर्यटन स्थल था, लेकिन उग्रवाद ने इसे बर्बाद कर दिया। उन्होंने कहा, विभिन्न समय पर वहां फोर्सेस तैनात रहीं। कुछ हिस्सों पर कब्जे भी हुए। 2007 तक जब मैं विधायक था, तब तक पार्क में कोई स्थायी पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था।अगर न्यू गांदरबल पावरहाउस प्रोजेक्ट पहले मंजूर हो जाता तो इलाके में बड़ा विकास हो सकता था। वित्तीय और प्रशासनिक अड़चनें हैं, फिर भी मैं इस मुद्दे को उठाने की पूरी कोशिश करूंगा। संवाद
गांदरबल के कंगन इलाके का ऐतिहासिक प्रांग पार्क आज पूरी तरह खंडहर में तब्दील, स्थानीय लोग कर रहे