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J&K: पहले करता था बढ़ई का काम, अब आतंकियों का मददगार निकला, पहलगाम में एफआरएस ने ओजीडब्ल्यू को किया गिरफ्तार

Fri, 20 Jun 2025 12:10 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर

सार

अमरनाथ यात्रा से पहले पहलगाम के लंगनबल चेकपॉइंट पर एफआरएस ने पहली बड़ी सफलता दर्ज करते हुए एक ब्लैकलिस्टेड ओजीडब्ल्यू की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया जो आतंकियों का मदद करता था। 
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जम्मू कश्मीर सुरक्षाबल - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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श्री अमरनाथ यात्रा 2025 से पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा पहलगाम के लंगनबल चेकपॉइंट पर स्थापित फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) ने अपनी पहली बड़ी सफलता दर्ज की है। वीरवार को एफआरएस के जरिए आतंकियों के मददगार एक ब्लैकलिस्टेड ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) की पहचान होते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर उसे मौके पर गिरफ्तार कर लिया।

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पहले करता था बढ़ई का काम, अब आतंकियों का मददगार निकला
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अनंतनाग जिले में पहलगाम के लंगनबल चेकपॉइंट पर वीरवार लगभग 5ः00 बजे पकड़े गए आरोपी की पहचान सीर हमदान (थाना मट्टन क्षेत्र) निवासी के रूप में हुई है, जो पहले बढ़ई का काम करता था। साल 2005 में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

गिरफ्तारी के बाद उसे आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस स्टेशन पहलगाम को सौंपा गया।बता दें कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अमरनाथ यात्रा के पहलगाम मार्ग पर कई महत्वपूर्ण स्थानों पर करीब दो सप्ताह पहले फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) स्थापित किया है, जिसका उद्देश्य वार्षिक तीर्थयात्रा पर आतंकवादी हमलों को रोकना है। यह सफलता एफआरएस के प्रभावी संचालन और तकनीक-संचालित पुलिसिंग की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।

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यात्रा मार्गों की सुरक्षा को बनाया सख्त
अधिकारियों ने बताया कि यह गिरफ्तारी राष्ट्र विरोधी तत्वों को स्पष्ट संदेश देती है कि अमरनाथ यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अवांछनीय गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यात्रा मार्गों पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी को पहले ही तेज किया जा चुका है और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की रियल-टाइम पहचान और कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। 

कैसे काम करता है एफआरएस?
अमरनाथ यात्रा मार्ग पर बढ़ती सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए पुलिस ने दो सप्ताह पहले ही एफआरएस सिस्टम स्थापित किया था। इस तकनीक में ब्लैकलिस्टेड आतंकियों और संदिग्ध ओजीडब्ल्यू का डाटा अपलोड किया गया है। जैसे ही कोई ऐसा चेहरा कैमरे की निगरानी में आता है, सुरक्षा केंद्र में हूटर बज उठता है और तुरंत अलर्ट जारी कर सुरक्षाबलों को कार्रवाई के लिए सक्रिय किया जाता है। एफआरएस चेहरे की विशिष्ट विशेषताओं का विश्लेषण कर डिजिटल पहचान सुनिश्चित करता है और उसे पहले से मौजूद डेटाबेस से मिलाकर सटीक मिलान करता है। इस तकनीक का उपयोग सुरक्षा, निगरानी, कानून प्रवर्तन और आतंकवाद रोधी अभियानों में बड़ी सफलता के साथ किया जा रहा है।

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