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J&K: कश्मीर में आवारा कुत्तों का आतंक; घाटी में हर दिन 17 लोग बन रहे शिकार, एक साल में 6,000 से ज्यादा केस

Fri, 20 Jun 2025 11:44 AM IST
निकिता गुप्ता अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

कश्मीर घाटी में जून 2024 से मई 2025 के बीच डॉग बाइट के 6,258 और कुल 1,2833 जानवरों के काटने के मामले सामने आए, जो अब तक का सबसे ऊंचा वार्षिक आंकड़ा है। विशेषज्ञों ने रेबीज के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई है और लोगों से समय पर टीकाकरण कराने की अपील की है।
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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कश्मीर घाटी में आवारा कुत्तों का खतरा अब सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य पर हमला बन गया है। श्रीनगर स्थित श्री महाराजा हरि सिंह (एसएमएचएस) अस्पताल के एंटी-रेबीज क्लिनिक (एआरसी) में जून 2024 से मई 2025 तक कुत्तों के काटने के 6,258 मामले दर्ज किए गए हैं। यानी हर दिन औसतन 17 से ज्यादा लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं।

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अस्पताल से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इसी अवधि में क्लिनिक में कुल 12,833 जानवरों के काटने से संबंधित मामले सामने आए, जिनमें से सबसे ज्यादा कुत्तों से जुड़े रहे। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक आंकड़ा है और यह घाटी में बेकाबू होते कुत्तों के संकट की गवाही देता है। पिछले 10 वर्षों में घाटी में डॉग और कैट बाइट की संख्या 70,000 के करीब पहुंच चुकी है, जो रेबीज जैसे जानलेवा संक्रमण को लेकर गंभीर चेतावनी है।

एसएमएचएस अस्पताल के अनुसार पिछले एक साल (जून 2024 से मई 2025) में अभी तक एआरसी में कुल 12,833 मामले सामने आए हैं। इनमें से 6,258 मामले डॉग बाइट, 6,095 कैट बाइट, जबकि 480 अन्य जानवरों के काटने के हैं।
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एक डॉक्टर ने बताया कि कुछ वर्षों में बिल्लियों के काटने की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है क्योंकि कई लोग उन्हें पालतू जानवर के रूप में रख रहे हैं, जबकि लगभग सभी कुत्ते के काटने की रिपोर्ट आवारा कुत्तों द्वारा की जाती है।कम्युनिटी मेडिसिन विभाग जीएमसी श्रीनगर के एचओडी डॉ. सलीम ने बताया कि रेबीज एक सार्वभौमिक रूप से घातक वायरल संक्रमण है, जिससे हर साल दुनियाभर में लगभग 59,000 मौतें होती हैं।

इनमें से 95 फीसदी मामले अफ्रीका और एशिया में होते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में एसएमएचएस के एआरसी में आने वाले मामलों की संख्या में कई गुना वृद्धि देखी है। लोग किसी भी काटने या खरोंच की घटना को नजरअंदाज न करें और तुरंत टीकाकरण करवाएं।

कैट बाइट के मामले भी तेजी से बढ़े
पिछले एक साल में एसएमएचएस की एआरसी में 6,095 बिल्लियों के काटने के मामले दर्ज हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड के बाद पालतू बिल्लियों को रखने का चलन बढ़ा है, लेकिन लोग टीकाकरण और स्वच्छता नियमों का पालन नहीं कर रहे। कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. सलीम के अनुसार पिछले तीन वर्षों में एआरसी में बिल्लियों के काटने के मामलों में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। लोगों को पालतू जानवरों की जिम्मेदार देखभाल और जागरूकता की सख्त जरूरत है। 

मासिक आंकड़े, डॉग बाइट (जून 2024 से मई 2025)
 
जून  530
जुलाई  598
अगस्त 521
सितंबर 515
अक्टूबर 540
नवंबर 423
दिसंबर 439
जनवरी 480
फरवरी 463
मार्च 524
अप्रैल 625
मई  601

वार्षिक डॉग बाइट आंकड़े (2015–2024)
 
2015-16 7,061
2016-17 5,832
2017-18 6,802
2018-19 6,397
2019-20 6,139
2020-21 4,808
2021-22 5,469
2022-23 6,875
2023-24 लगभग 8,800
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