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धधकते जंगलों से चारे की हुई मुश्किल

Thu, 11 May 2017 09:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर
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जंगलों में लगी आग - फोटो : file photo
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आग से जलते जंगल जहां पर्यावरण के लिए भारी खतरा बने है वही पशुपालकों को इन जंगलों से चारापत्ती व घास भी आसानी से नहीं मिल पा रही है। ब्लाक मुख्यालय पर प्रधान संगठन ने क्षेत्र पंचायत की बैठक में पशुपालकों को निशुल्क चारा उपलब्ध करवाने व क्षेत्रों में चारा बैंक खोलने के लिए प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। 
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सिल्काखाल, बडियारगढ़, चौरास, कड़ाकोट आदि के जंगलों में लगी आग से पशुपालकों की चिंताएं बढ़ने लगी है। जंगल जलने के बाद  ग्रामीण पशुपालकों को अपने पशुओं के लिए चारा जुटाना चुनौती बना हुआ है। हर साल फायर सीजन शुरू होते ही गरीब पशुपालकों को चारे की समस्या से जूझना पड़ जाता है, लेकिन सरकार की ओर से आज तक इन  पशुपालकों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है।

प्रधान संगठन के अध्यक्ष बासुदेव भट्ट ने कहा कि जंगलों में लगी आग को बुझाने में विभाग हर साल नाकाम साबित हो रहा है। कहा कि फायर सीजन में सरकार को पशुपालकों को निशुल्क चारा उपलब्ध करवाना चाहिए। कहा कि सरकार की ओर से पशुओं के लिए जो चारा भेली उपलब्ध करवाई जाती है उसकी कीमत अधिक व चारा बैंक दूर होने का खर्चा उठाना हर पशुपालक के लिए संभव नहीं है। ऐसे में कई गरीब काश्तकार घाटे का सौदा कर अपने पशुओं को औने-पौने दामों पर बेच देते है।
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ऐसे में क्षेत्र समिति की बैठक में पशुपालकों को निशुल्क चारा उपलब्ध करवाने क्षेत्रों में चारा बैंक खोलने के लिए प्रस्ताव रखा जाएगा।  

चारा बैंक में अभी पशुओं के लिए पर्याप्त चारे का स्टॉक है। 24 किग्रा की अनुदान चारा भेली की कीमत 210 रुपये है। कीमत में कभी-कभी 10 से 20 रुपये उतार चढ़ाव आ जाता है। 
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डॉ प्रीति पंत, पशुचिकित्साधिकारी, कीर्तिनगर
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