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Leh-Ladakh: लेह में एस्ट्रोफोटोग्राफी और स्टारगेजिंग का अनोखा अनुभव, एस्ट्रो वीक बना आकर्षण का केंद्र

Mon, 25 May 2026 01:20 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, लेह

सार

लद्दाख एस्ट्रो वीक 2026 के चौथे दिन विद्यार्थियों, पर्यटकों और खगोल विज्ञान प्रेमियों ने व्याख्यान, एस्ट्रोफोटोग्राफी और स्टारगेजिंग गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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पदुम में दूरबीन से खगोलीय दृश्य देखते उत्साहित लोग। - फोटो : सूचना विभाग
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विस्तार
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लद्दाख एस्ट्रो वीक 2026 के चौथे दिन पर्यटन विभाग परिसर में विद्यार्थियों, पर्यटकों और खगोल विज्ञान प्रेमियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। खगोल विज्ञान के प्रति जागरूकता और वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में शैक्षणिक व्याख्यान, विशेषज्ञों के साथ संवादात्मक सत्र, एस्ट्रोफोटोग्राफी प्रदर्शनी और गाइडेड स्टारगेजिंग गतिविधियां आयोजित की गईं, जिन्होंने आगंतुकों को विज्ञान और ब्रह्मांड का रोचक अनुभव प्रदान किया।

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कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय खगोलीय वेधशाला के दोरजे आंगचुक के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने अतिथियों, विद्यार्थियों, पर्यटकों और स्थानीय निवासियों का स्वागत करते हुए खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति बढ़ती जन रुचि पर प्रसन्नता व्यक्त की।

शाम का मुख्य आकर्षण भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान और इंडियन एसोसिएशन फॉर जनरल रिलेटिविटी एंड ग्रेविटेशन की प्रोफेसर प्रबावती चिंगंगबाम का व्याख्यान रहा। ‘आवर प्लेस इन द यूनिवर्स: इज इट स्पेशल?’ विषय पर अपने प्रस्तुतीकरण में उन्होंने आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान और मानवता की ब्रह्मांड संबंधी समझ के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से बताया।
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टेलीस्कोप से प्राप्त चित्रों, दृश्य सामग्रियों और स्लोन डिजिटल स्काई सर्वे के आंकड़ों का उपयोग करते हुए प्रोफेसर चिंगंगबाम ने आकाशगंगाओं की संरचना और दृश्य ब्रह्मांड के बारे में जानकारी दी। उन्होंने हबल का नियम, रेडशिफ्ट, कॉस्मिक स्पीड लिमिट, प्लैंक मिशन, कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड रेडिएशन, न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत, आइंस्टीन का सामान्य सापेक्षता सिद्धांत और विस्तारशील ब्रह्मांड जैसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक विषयों पर भी चर्चा की। उन्होंने क्वासर वितरण और समदिशीयता से संबंधित हालिया अध्ययनों पर भी प्रकाश डाला।

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