पुलवामा में पत्रकारों से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लद्दाख के मुद्दे जम्मू-कश्मीर से अलग हैं, लेकिन एक मित्र और शुभचिंतक के तौर पर वह लद्दाख और कारगिल के नेताओं से यही कहना चाहेंगे कि केंद्र के मौखिक आश्वासनों पर तब तक भरोसा न करें, जब तक उन्हें लिखित और आधिकारिक रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेज नहीं मिल जाता।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर के संदर्भ का जिक्र करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने का आश्वासन दिया गया था लेकिन करीब दो साल बीतने के बावजूद यह पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने लद्दाख नेतृत्व से संभव हो तो औपचारिक हलफनामे के रूप में लिखित आश्वासन लेने की बात कही।
पुलवामा में विकास कार्यों की समीक्षा
मुख्यमंत्री बुधवार को पुलवामा जिले में विकास परियोजनाओं की समीक्षा करने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन और उपलब्ध बजट के इस्तेमाल के मामले में पुलवामा जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों में शीर्ष पांच में शामिल हो सकता है।
उन्होंने जिला प्रशासन के प्रदर्शन की सराहना करते हुए अधिकारियों से मौजूदा कार्य सत्र के बचे दो-तीन महीनों में अधिक से अधिक धनराशि का उपयोग करने को कहा। उमर ने बताया कि बुधवार को पुलवामा में करीब 100 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास किया गया। इनमें सड़क, स्कूल, अस्पताल और पुलों से जुड़े कार्यों के अलावा डेयरी-प्रोसेसिंग गांव की स्थापना भी शामिल है।
एनएचएम कर्मचारियों से आंदोलन खत्म कर बातचीत की अपील
एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उनकी मांगों पर बातचीत आंदोलन समाप्त होने के बाद ही की जाएगी। उन्होंने कर्मचारियों से बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि आंदोलन जारी रहने के दौरान सरकार बातचीत नहीं कर सकती क्योंकि इससे ऐसी स्थिति बन सकती है जहां दूसरे संगठन भी अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरने को उचित समझें।
नेता प्रतिपक्ष के बयान पर टिप्पणी से इनकार
विधानसभा सत्र की अवधि को लेकर नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा के बयान पर प्रतिक्रिया देने से मुख्यमंत्री ने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष रोज बयान देते हैं और उनके पास हर दिन जवाब देने का समय नहीं है। उमर ने कहा कि वह महीने में एक बयान का जवाब देंगे और अगला जवाब अक्तूबर में देंगे।