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J&K Special: '90 और 2000 के दशक जैसा आतंक अब नहीं, कभी सोचा नहीं था बिना हथियार के लौटूंगा शोपियां', दीप भगत

Mon, 09 Feb 2026 02:28 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर दीप भगत ने अपने वायरल वीडियो में शोपियां लौटने के अनुभव को साझा किया, जहां उन्होंने कभी ऑपरेशन किए थे और अब बिना हथियार शांति का अनुभव किया। उन्होंने बताया कि नया कश्मीर पहले के 90 और 2000 के दशक जैसा नहीं रहा, आतंकवाद पर काबू पाने के बाद क्षेत्र में बड़े बदलाव आए हैं।
 
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पूर्व ब्रिगेडियर दीप भगत - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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यह नया कश्मीर है। यहां बड़े बदलाव आए हैं। पहले कभी सोचा नहीं था कि शोपियां में कभी बिना हथियार के लौटूंगा। यह कहना है सेना के सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर दीप भगत का। यहां देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा चुके सेवानिवृत्त अधिकारी का वीडियो वायरल हुआ है। इसमें उन्होंने शोपियां जिले के अपने अनुभवों को साझा किया है। वीडियो उनकी दो साल पहले की यात्रा का है।

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सेवानिवृत्त अधिकारी ने वीडियो में जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले की यात्रा का जिक्र किया है। जहां उन्होंने कभी ऑपरेशन किए थे। पोस्ट में ब्रिगेडियर भगत ने बताया कि वे तीन दशकों तक सेना में विभिन्न पदों पर रहे। इसमें कमांडो स्कूल में प्रशिक्षक के रूप में भी सेवा दी। वीडियो में वे भावुक होकर कहते हैं कि मैं शोपियां में प्रवेश कर रहा हूं और मैं कभी नहीं सोच सकता था कि जीवन में कभी यहां बिना किसी हथियार और सुरक्षा के लौटूंगा। 90 के दशक और 2000 के दशक में यहां आतंकवाद से लड़ने वाले सैनिक कभी कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि वे यहां इस तरह लौट सकेंगे।

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नए कश्मीर पर मुझे गर्व, ब्रिगेडियर
वीडियो में ब्रिगेडियर कह रहे हैं कि कश्मीर 90 और 2000 के दशक जैसा नहीं रहा। नए कश्मीर पर मुझे गहरा गर्व हो रहा है। यह अनुभव पूर्व सैन्य अधिकारी के लिए अजीब लेकिन खुशी भरा रहा क्योंकि जहां पहले हिंसा आम थी वहीं अब शांति और खुलेपन का माहौल है। उनका यह वीडियो नए कश्मीर की बदलती तस्वीर को दर्शाता है।

दो दशक पहले वे यहां हथियारों के साथ ऑपरेशन करते थे
ब्रिगेडियर भगत ने बताया कि दो दशक पहले वे यहां युद्ध उपकरण और हथियारों के साथ ऑपरेशन करते थे लेकिन दो साल पहले वे बाइक पर पर्यटक के रूप में बिना हथियार व बिना सुरक्षा लौटे। सिर्फ खुले रास्ते और खुले दिलों के साथ। उन्होंने कैप्शन में लिखा, शोपियां जिसका कभी तनाव में नाम लिया जाता था आज मेरा शांति से स्वागत कर रहा है। यह बदलाव का नजारा है। यही उम्मीद का एहसास है।
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