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J&K: अमरनाथ यात्रियों का संबल बना सीआरपीएफ का 'मे आइ हल्प यू' अभियान, महिला जवानों ने जीता श्रद्धालुओं का दिल

Sun, 05 Jul 2026 11:16 AM IST
Nikita Gupta अमृतपाल सिंह बाली अमर उजाला, नेटवर्क बालटाल

सार

अमरनाथ यात्रा के दौरान बालटाल आधार शिविर पर सीआरपीएफ का 'मे आई हेल्प यू' अभियान श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा, मार्गदर्शन और हर आवश्यक सहायता का भरोसेमंद केंद्र बना हुआ है। महिला जवान 24 घंटे मुस्तैदी से यात्रियों को स्वास्थ्य, संचार, भोजन, ठहरने और अन्य आपात सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनकी यात्रा को सुरक्षित और सुगम बना रही हैं।
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बालटाल में श्रद्धालुओं की मदद करतीं सीआरपीएफ की महिला जवान। - फोटो : अमर उजाला
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अमरनाथ यात्रा के दुर्गम रास्तों पर बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए बढ़ रहे श्रद्धालुओं के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का 'मे आई हेल्प यू' अभियान एक सुरक्षा कवच और सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरा है। मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के बालटाल आधार शिविर पर तैनात सीआरपीएफ की महिला जवान बेहद विपरीत परिस्थितियों में भी चौबीसों घंटे मुस्तैदी से अपनी सेवाएं दे रही हैं।

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बालटाल में श्रद्धालुओं की मदद करतीं सीआरपीएफ की महिला जवान। - फोटो : अमर उजाला
देश के कोने-कोने से आने वाले यात्रियों के लिए यह अभियान न केवल उनकी यात्रा को सुरक्षित और सुगम बना रहा है, बल्कि कश्मीर की वादियों में उन्हें घर जैसा सुरक्षित माहौल और आत्मीयता भी प्रदान कर रहा है।पिछले वर्ष शुरू किए गए इस अभिनव प्रयास को इस साल और अधिक व्यापक एवं संवेदनशील रूप में ज़मीनी स्तर पर उतारा गया है, ताकि देश के सुदूर राज्यों से आए तीर्थयात्रियों को किसी भी तरह की प्रशासनिक या व्यावहारिक असुविधा का सामना न करना पड़े।

इस विशेष सहायता दस्ते में शामिल सीआरपीएफ की जांबाज महिला जवान पुष्प वर्मा ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को हर संभव सहायता और सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। बालटाल जैसे व्यस्त और संवेदनशील आधार शिविर पर तैनात यह टीम यात्रियों को मार्ग के रास्तों की सटीक जानकारी देने, संचार संबंधी नेटवर्क की समस्याओं को दूर करने, भोजन और ठहरने की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा स्वास्थ्य संबंधी किसी भी आपात स्थिति से निपटने में अग्रिम भूमिका निभा रही है।

DIG सीआरएफपी सुधीर कुमार - फोटो : अमर उजाला
यात्रा मार्ग पर अचानक ऑक्सीजन की कमी या अन्य शारीरिक समस्याओं के कारण अगर किसी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ती है, तो यह टीम बिना एक पल गंवाए तत्काल मौके पर तैनात फर्स्ट एड कर्मियों को बुलाती है। यदि स्थिति गंभीर पाई जाती है, तो बिना समय गंवाए मरीज को त्वरित उपचार के लिए तुरंत बालटाल बेस कैंप स्थित अत्याधुनिक अस्पताल में स्थानांतरित किया जाता है। जवानों का कहना है कि ड्यूटी पर तैनाती से पहले उच्च अधिकारियों द्वारा उन्हें विशेष रूप से कठिन परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण और जरूरी दिशा-निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन जनता की सेवा और देश के नागरिकों की सुरक्षा करने का जज्बा उनके भीतर से आता है, जिससे उन्हें वर्दी पहनने पर बेहद गर्व की अनुभूति होती है।

एक अन्य महिला जवान ज्योति एस ने बताया कि इस साल 'मे आई हेल्प यू' की टीम में लगभग 30 से 40 चुनिंदा महिला जवानों को शामिल किया गया है, जो चौबीसों घंटे अलग-अलग शिफ्टों में मुस्तैद रहती हैं। हमारा एक ही मकसद है कि देश भर से आए भक्तों को मदद पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि टीम का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना है, विशेषकर भाषा संबंधी कठिनाइयों, स्वास्थ्य समस्याओं तथा यात्रा मार्ग की जानकारी से जुड़ी परेशानियों का समाधान करना। उन्होंने कहा कि वर्दी पहनकर जनसेवा करना उनके लिए गर्व की बात है और पूरी टीम का प्रयास रहता है कि यात्रा के दौरान किसी भी श्रद्धालु को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

बालटाल में श्रद्धालुओं की मदद करतीं सीआरपीएफ की महिला जवान। - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि इस अभियान की सबसे अनूठी विशेषता इसकी भाषाई विविधता है। दरअसल, अमरनाथ यात्रा में हिस्सा लेने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से ऐसे श्रद्धालु भी आते हैं जिन्हें हिंदी या स्थानीय कश्मीरी भाषा का ज्ञान नहीं होता, जिससे उन्हें अपनी बात कहने में भारी परेशानी होती है। इस समस्या का समाधान करते हुए सीआरपीएफ ने अपने बल को एक 'मिनी इंडिया' के रूप में पेश किया है।

इस सहायता दल में भारत के लगभग हर राज्य की महिला जवानों को शामिल किया गया है, जो यात्रियों की अपनी मातृभाषा को समझकर उनसे उसी लहजे में संवाद करती हैं। इससे भाषा की दीवार पूरी तरह टूट जाती है और दक्षिण या पूर्वोत्तर भारत से आए श्रद्धालुओं को भी अपनी बात समझाने में कोई दिक्कत नहीं होती। चाहे आरएफआईडी कार्ड सेंटर का पता लगाना हो, रजिस्ट्रेशन काउंटर की लंबी लाइनों में मदद करनी हो या फिर खोए-पाए सामान की जानकारी जुटानी हो, ये जवान हर मोड़ पर एक सच्चे मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही हैं।
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बालटाल में श्रद्धालुओं की मदद करतीं सीआरपीएफ की महिला जवान। - फोटो : अमर उजाला
इस अभियान की सफलता और इसकी पृष्ठभूमि को लेकर सीआरपीएफ के नोडल अधिकारी (बालटाल मार्ग) डीआईजी सुधीर कुमार ने अमर उजाला के साथ बात करते हुए बताया कि किसी भी अच्छे विचार को ज़मीनी स्तर पर उतारने के लिए पूरे संगठन का सहयोग अनिवार्य होता है और यह सफलता पूरे सीआरपीएफ परिवार के साझा प्रयासों का परिणाम है। पिछले साल इस अभियान को लेकर देश भर के श्रद्धालुओं से जो सराहना और धन्यवाद के संदेश मिले, वह पूरी टीम की कल्पना से परे थे।

छोटी से छोटी सहायता को भी जनता ने जिस तरह से सराहा, उसने जवानों के मनोबल को दोगुना कर दिया। इस साल भी यात्रा की शुरुआत से ही यह टीम पूरी तरह से तैयार है। हाल ही में रजिस्ट्रेशन काउंटर के बाहर परेशान हो रहे कुछ श्रद्धालुओं की समस्या को जब इस टीम ने तुरंत सुलझाया, तो यात्रियों ने व्यक्तिगत रूप से कैंप में आकर बल के इस मानवीय चेहरे की जमकर तारीफ की। सीआरपीएफ का यह अभियान साबित करता है कि बल न केवल सीमा और आंतरिक सुरक्षा में बल्कि देश के नागरिकों की सेवा और उनके प्रति सहृदयता दिखाने में भी हमेशा सबसे आगे रहता है।
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