नियमों के विपरीत फारूक ने मिर्जा को बनाया कोषाध्यक्ष
ईडी के अनुसार जेकेसीए में एहसान अहमद मिर्जा को फारूक अब्दुल्ला ने कोषाध्यक्ष नियुक्त किया था जबकि इस पद के लिए कार्यकारी समिति की सदस्यता में चयनित होना अनिवार्य होता है। ईडी ने कहा है कि मिर्जा की नियुक्ति असल में यह सुनिश्चित करने के लिए की गई कि वित्त मामले मिर्जा के ही नियंत्रण में रहें। बाद में मिर्जा को वित्त समिति का सदस्य बना दिया गया, जो कि पूरी तरह से नियमों के विपरीत था। यही नहीं मिर्जा ने बीसीसीआई से मिली धनराशि को अपने खाते में ट्रांसफर करवाया और फिर इस पैसे का इस्तेमाल अपने निजी स्वार्थ और कारोबारी देनदारी चुकाने के लिए किया।
मीर ने समिति से छिपाई वित्तीय अनियमितता
ईडी का कहना है कि मीर मंजूर गजनफर के पास जेकेसीए की कार्यकारी समिति की सदस्यता थी और जेकेसीए का पदाधिकारी होने के बावजूद मीर ने मिर्जा के साथ अपना नाम भी बैंक खाते में शामिल करवाया। यह कदम भी जेकेसीए नियमों के विपरीत था। मीर ने दावा किया था कि वित्तीय मामलों में अनियमितता पाए जाने उन्होंने फारूक अब्दुल्ला को पत्र के जरिए सूचित किया था, लेकिन चुने हुए कोषाध्यक्ष होने के बावजूद वे इस मामले को कार्यकारी समिति के संज्ञान में नहीं लाए। यही नहीं, मीर ने जेकेसीए के खाते से 7.11 करोड़ रुपये संयुक्त खाते में ट्रांसफर करवाए