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जम्मू कश्मीर: वंदे मातरम के सम्मान में खड़े रहे अब्दुल्ला, कांग्रेस को लगी मिर्ची तो NC बोली- शर्तें मत थोपो

Wed, 09 Sep 2026 12:53 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

जम्मू-कश्मीर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण बजाए जाने पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई और स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा अपनाए गए संस्करण का सम्मान करने की अपील की।
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जम्मू-कश्मीर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से वंदे मातरम पूरा गाना और सम्मान में खड़े होना कांग्रेस को रास नहीं आया। गठबंधन धर्म का पाठ पढ़ाते हुए पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सहयोगी दलों को स्वतंत्रता सेनानियों की सोच और निर्णय का सम्मान करते हुए उसी संस्करण को गाना चाहिए, जिसे उस समय अपनाया गया था।

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पार्टी के अनुसार इसका उद्देश्य गीत को सांप्रदायिक रंग दिए जाने से बचाना है। वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि वंदे मातरम के अपनाए गए संस्करण पर कायम रहना देश के धर्मनिरपेक्ष और समावेशी गणराज्य के चरित्र को बनाए रखने का हिस्सा है। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि कांग्रेस गठबंधन सहयोगियों पर अपनी शर्तें नहीं थोप सकती, वहीं बीजेपी ने कांग्रेस पर मुस्लिम लीग जैसा होने का आरोप लगाया है।

श्रीनगर में सोमवार से शुरू हुए जम्मू-कश्मीर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में राष्ट्रगीत के पूरे संस्करण को गाए जाने पर आपत्ति सामने आई है। कार्यक्रम में गाए जा रहे गीत के पूरे संस्करण का वीडियो शेयर करते हुए, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस को सलाह दी कि गीत के पहले दो अंतरे ही गाएं। सभी छह अंतरे गाने की जरूरत नहीं है। कार्यक्रम में उमर अब्दुल्ला व फारूक अब्दुल्ला भी माैजूद थे। सभी ने पूरे छंद गाए और सम्मान में खड़े भी हुए।

वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया कि हमारे लिए महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, आचार्य नरेंद्र देव, मौलाना आज़ाद, सरोजिनी नायडू और जेबी कृपलानी की सोच और फैसले सबसे अहम हैं। इस सोच को बनाने में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह की भी बड़ी भूमिका थी। हम सम्मान और विनम्रता के साथ अपने सहयोगियों से चाहेंगे कि वे हमारे आजादी के दीवानों की समझ और फैसले का सम्मान करें। हम चाहेंगे कि वे हमारे साथ मिलकर इस खूबसूरत और ऐतिहासिक गीत का वही वर्जन गाएं, जिसे उन नेताओं ने अपनाया था।

नेकां की ओर से बशीर अहमद वीरि ने कहा कि गठबंधन सहयोगी के तौर पर आप यह तय नहीं कर सकते कि गाना है या कितना गाना है। वेणुगोपाल को ट्वीट करने का अधिकार है, लेकिन वे अपनी बात थोप नहीं सकते। यह लोगों की पसंद है। हम लोगों पर कुछ भी थोपने के खिलाफ हैं।

वहीं, भाजपा ने पूरे 'वंदे मातरम' पर आपत्ति जताने के लिए कांग्रेस की आलोचना की। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता जोरावर सिंह जम्वाल ने कहा कि पूरे वर्जन को गाने पर कांग्रेस की आपत्ति उसकी सोच को बयां करती है। कांग्रेस सच माइने में 21वीं सदी की नई मुस्लिम लीग बन गई है।

 
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पहले वंदे मातरम, फिर जन गण मन होगा
गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के गायन और बजाने को लेकर नए निर्देश जारी किए थे। इसमें दोनों के सही बोल, उच्चारण और तय प्रोटोकॉल का पालन करने को कहा गया था।

निर्देशों के मुताबिक, अगर किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम और जन गण मन दोनों गाए या बजाए जाते हैं, तो पहले वंदे मातरम और उसके बाद राष्ट्रगान होगा। अगर किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का अपना राज्य गीत भी है, तो पहले राज्य गीत फिर वंदे मातरम और अंत में जन गण मन रहेगा। जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा इसे सख्ती से लागू भी करा रहे हैं।

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