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World Weather Day: मौसम के बदलाव से कश्मीर में सिकुड़ रहे ग्लेशियर, खेती, पानी व पनबिजली पर असर

Mon, 23 Mar 2026 03:37 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

कश्मीर के ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं, जिससे खेती, पानी की सप्लाई और पनबिजली समेत कई क्षेत्र प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
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सुरक्षाबल। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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मौसम में आ रहे बदलावों का असर कश्मीर के ग्लेशियरों पर भी पड़ा है। वे सिकुड़ रहे हैं। झेलम बेसिन ग्लेशियरों पर लंबे समय तक चला अध्ययन बताता है कि इसका असर कश्मीर में खेतीबाड़ी, पानी की सप्लाई, पनबिजली आदि सभी क्षेत्रों पर देखने को मिल सकता है। पीर पंजाल क्षेत्र के भी इससे प्रभावित होने की आशंका है।

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कश्मीर में पानी का स्रोत ग्लेशियर ही हैं। जलवायु परिवर्तन की वजह से ये लगातार पिघल रहे हैं। इसकी वजह से इनसे मिलने वाले पानी में कमी आई है। मल्टी-टेम्पोरल सैटेलाइट डेटा, फील्ड सर्वे और जियोस्पेशियल विश्लेषण से कोलाहोई, शेषराम, चिरसर -1 और 2, प्राणमार्ग और होकसर जैसे प्रमुख ग्लेशियरों के सिकुड़ने की बात साबित हुई है। इनके पीछे हटने की दर 6-20 मीटर प्रति वर्ष आंकी गई है। इनके क्षेत्रफल में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

वैज्ञानिकों ने ग्लेशियरों का वर्ष 1971 से 2024 तक विश्लेषण किया है जिससे पता चला कि ग्लेशियरों की लंबाई और सतह के क्षेत्रफल में भी लगातार कमी आई है जो जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिक्रिया का परिणाम है।
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भू-विज्ञानी जाहिद मजीद शाह के अनुसार झेलम बेसिन का सबसे बड़ा ग्लेशियर कोलाहोई सबसे ज्यादा पीछे हटा है। करीब 50 वर्ष में यह 784 मीटर सिकुड़ा है। इसके अतिरिक्त पूर्वी लिद्दर में स्थित शेषराम ग्लेशियर 1979 से 2023 तक 627 मीटर पीछे हटा है। लंबाई में हुई इस कमी के साथ-साथ ग्लेशियरों के सतह क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

यह रिसर्च बीते सितंबर में ग्लेशियर रिट्रीट, मैपिंग एंड लैंडफॉर्म इवॉल्यूशन इन झेलम बेसिन, कश्मीर नाम से प्रतिष्ठित रिसर्च गेट जर्नल में प्रकाशित हुई है। इनमें शाह के साथ ही राकेश मिश्र, मुनीर मुख्तार, रम्या नंबूदरी शामिल रहे हैं।

ये ग्लेशियर पीछे हटे

चिरसर1 290 मीटर
चिरसर2 339 मीटर
शिशराम 378 मीटर
प्राणमार्ग 354 मीटर
होकसर 669 मीटर
ब्रमसर 486 मीटर
थाजवास 426 मीटर
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दो सौ से अधिक रॉक ग्लेशियर भी बने:
ग्लेशियरों के सिकुड़ने के कारण दो सौ से अधिक रॉक ग्लेशियर (48.26 वर्ग किमी) और कई प्रो-ग्लेशियल झीलें भी बनी हैं। ये बर्फीले क्षेत्र में हो रहे महत्वपूर्ण बदलावों का संकेत देती हैं। इन बदलावों के गंभीर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव हैं।

अध्ययन में ये ग्लेशियर शामिल
यह अध्ययन झेलम बेसिन के लिद्दर, विशव-रेम्बियारा और सिंध उप-बेसिनों में फैले ग्लेशियरों को शामिल किया गया है। मुख्य ग्लेशियरों में कोलाहोई, शेषराम और होकसर (लिद्दर बेसिन); चिरसर-1, चिरसर 2, ब्रमसर, प्राणमार्ग और थाजवास (सिंध बेसिन) शामिल हैं।
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