चार दिनों तक सीमा पार से भीषण गोलाबारी के बाद जब बंदूकें शांत हुईं, तो उड़ी के लोग घर लौटने लगे हैं। उन्हें उम्मीद है कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कायम रहेगा।
गाेलाबारी में सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से एक उड़ी में दुकानें फिर से खुल गई हैं और जीवन धीरे-धीरे फिर से शुरू हो रहा है। गोलाबारी के कारण हजारों लोग अपने घर और सामान छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर भागने को मजबूर हुए थे।
स्थानीय निवासी लाल हुसैन कोली ने कहा, यह हमारे लिए अच्छा दिन है। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव होने पर ज़्यादा नुकसान सीमा पर रहने वाले लोगों को होता है। पिछले चार दिनों में हमने कई जानें गंवाई हैं। अपने घर और संपत्तियों को नष्ट होते देखा है।
फारूक खटाना ने दोनों देशों से स्थायी युद्धविराम के लिए प्रतिबद्ध होने का आग्रह करते हुए कहा, हम बिना किसी डर के जीना चाहते हैं। पूर्णकालिक युद्धविराम ही एलओसी पर रहने वाले हम जैसे लोगों के लिए शांति का एकमात्र रास्ता है।उड़ी के एक अन्य निवासी फिरोज अहमद ने कहा कि गोलाबारी से हमारी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है। हमें उम्मीद है कि यह शांति बनी रहेगी।”
विधायक डॉ. सज्जाद शफी पूरे संकट के दौरान उड़ी में ही रहे, राहत प्रयासों की देखरेख की और सुनिश्चित किया कि विस्थापित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचे। उन्होंने कहा कि लोग जब तक गोले हटा नहीं दिए जाते, तब तक घर न लौटें।
पुलिस ने जिले के 17 गांवों में लगभग 20 बिना फटे हुए बम मिलने की सूचना दी है। इनमें से सात को कमलकोट, मधान, गौहलान, सलामाबाद, बिजहामा, गंगरहिल और गवाल्टा में निष्क्रिय कर दिया गया है। प्रशासन ने इन छह गांवों के निवासियों को वापस लौटने की अनुमति दे दी है। अधिकारियों ने निवासियों के लिए सख्त सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं।