- स्थानीय दुकानदारों से बार-बार बिना पैसे सामान लेता था, विभाग ने तीन साल के लिए इंक्रीमेंट जब्त करने की दी थी सजा
संवाद न्यूज एजेंसी
बारामुला। जम्मू-कश्मीर पुलिस विभाग ने कांस्टेबल सैयद सज्जाद अहमद की ओर से दायर एक पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। विभाग ने जनता के साथ दुर्व्यवहार से जुड़े एक मामले में दी गई सजा को बरकरार रखा है।
बारामुला पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि जांच में पहले यह साबित हो गया था कि उक्त कर्मचारी ने जब वह पुलिस चौकी बाबा रेशी में तैनात था तो चेतावनी दिए जाने के बावजूद उसने स्थानीय दुकानदारों से बार-बार बिना पैसे दिए सामान लिया था। उसका यह आचरण बार-बार किया जाने वाला, जान-बूझकर किया गया और एक पुलिस अधिकारी के लिए अशोभनीय पाया गया जिससे जनता का विश्वास कम हुआ।
इसे ध्यान में रखते हुए तीन साल के लिए एक वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) को जब्त करने की सजा दी गई थी। अब पुनर्विचार के बाद इस सजा को बरकरार रखा गया है। उन्होंने बताया कि पुनर्विचार याचिका में व्यक्तिगत कठिनाई और पछतावे का हवाला दिया गया था। हालांकि मूल आदेश में हस्तक्षेप को सही ठहराने के लिए कोई नए तथ्य या प्रक्रियात्मक त्रुटियां नहीं पाई गईं। दुर्व्यवहार की गंभीर प्रकृति और जनता के विश्वास पर इसके प्रभाव को देखते हुए इस सजा को उचित और आनुपातिक माना गया है।
प्रवक्ता ने कहा कि बारामुला पुलिस जनता के विश्वास को प्रभावित करने वाले दुर्व्यवहार के प्रति ''शून्य-सहिष्णुता का दृष्टिकोण अपनाती है। पुलिस बल के भीतर ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रहेगी। बारामुला पुलिस पेशेवर आचरण के उच्चतम मानकों को बनाए रखने और जनता की ओर से जताए गए विश्वास की रक्षा करने की अपनी प्रतिबद्धता पर दृढ़ है।