श्रीनगर। लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू ने अपने संदेश में नए आतंकियों को आत्मसमर्पण करने को कहा है। उन्होंने कहा कि उनके पास अपने परिवार के साथ जुड़ने का अभी भी मौका है। हाथ में बंदूक लेकर फोटो खिंचवाने और वीडियो रिलीज करने से कोई भी आतंकी नहीं बन जाता।
मंगलवार को श्रीनगर में 15वीं कोर के मुख्यालय में इंफेंट्री डे पर बीएस राजू ने कहा कि हाल ही में 4 स्थानीय युवाओं ने आतंक को छोड़ मुख्यधारा का रास्ता अपनाया है। और भी हैं जो लौटना चाहते हैं। हम ऐसे युवाओं को वापिस लाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि घाटी में हालात बदल रहे हैं और युवाओं को इस अवसर को नहीं गंवाना चाहिए। अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। जो पढ़ाई पूरी कर चुके हैं, उन्हे नौकरी की तलाश करनी चाहिए या अपने पैरों पर खुद खड़ा होने की कोशिश करे। इंफेंट्री डे को लेकर उन्होंने कहा कि इंफेंट्री एक महत्वपूर्ण नाम है और इंफेंट्री डिवीजन के सिपाही के पास वायु सेना और नौसेना जैसी अन्य एजेंसियों के साथ भी काम करने की क्षमता है। इंफेंट्री हर लड़ाई में एक महान भूमिका निभा रही है। हम किसी भी तरह का काम करने में सक्षम हैं।
कुछ समय से घुसपैठ नहीं करा पाया पाकिस्तान
सेना की 19 इंफेंट्री डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल वीरेंदर वत्स ने इंफेंट्री डे पर बारामुला में आयोजित सम्मान समारोह में कहा कि पाकिस्तान पिछले कुछ समय से घुसपैठ की कोशिश में सफल नहीं हो पाया है। एलओसी पर हिंसक वारदातों में कमी पर उन्होंने कहा कि यह कहना ठीक नहीं होगा कि पाकिस्तान के माइंडसेट में बदलाव आया है। हम यह नहीं कह सकते कि ऐसी स्थिति कब तक एलओसी पर रहेगी।
यह पूछे जाने पर कि क्या चीन के कारण एलओसी पर कुछ नए मुद्दे खड़े हुए हैं, इस पर उन्होंने कहा कि चीन के साथ गतिरोध के बावजूद सेना की सतर्कता में कोई कमी नहीं आई है। एलओसी के पार से ड्रग्स और हथियार तस्करी पर रोक लगने के सवाल पर कहा कि पाकिस्तान ने ड्रोन से हथियारों और ड्रग्स की तस्करी करने के प्रयास किए थे लेकिन केवल मैदानी इलाकों में।
इसलिए मनाया जाता है इंफेंट्री डे
इंफेंट्री डे पर उन्होंने कहा कि 27 अक्तूबर 1947 को बारामुला में कबाइलियों से लड़ते हुए जो जवान शहीद हुए थे, उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन सुबह करीब 10.30 बजे 1 सिख रेजीमेंट के जवान श्रीनगर एयरपोर्ट पर लैंड हुए थे। लेफ्टिनेंट कर्नल दीवान रणजीत राय की अगुवाई में एक टुकड़ी बारामुला की ओर बढ़ी और यहां दुश्मनों का सामना किया और देश के लिए शहादत दी।