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Amarnath Yatra 2025: चेहरे से होगी संदिग्धों की पहचान, पहलगाम मार्ग पर फेशियल रिकग्निशन सिस्टम स्थापित

Tue, 10 Jun 2025 06:56 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

फेशियल रिकग्निशन सिस्टम की स्थापना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि जल्द ही बालटाल मार्ग पर भी यह सिस्टम स्थापित करने की तैयारी है। 
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अमरनाथ यात्रा (फाइल फोटो) - फोटो : एजेंसी
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विस्तार
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श्री अमरनाथ यात्रा के पहलगाम मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त बना दिया गया है। अब हर व्यक्ति को चेहरे की पहचान स्थापित की जाएगी। इसके जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पहलगाम मार्ग पर कई स्थानों पर फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) स्थापित किया है।

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22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस और सतर्क हो गई है। यह अत्याधुनिक तकनीक ब्लैकलिस्टेड और संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करते ही सुरक्षा बलों को तत्काल सतर्क कर देगी, जिससे आतंकवादी हमलों को रोकने में मदद मिलेगी। एफआरएस में सक्रिय आतंकवादियों और ओवरग्राउंड वर्कर्स की तस्वीरों का डेटाबेस पहले से ही दर्ज है।

जैसे ही कोई संदिग्ध व्यक्ति कैमरे के दायरे में आता है, सुरक्षा नियंत्रण केंद्र पर अलार्म बज उठता है, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो पाती है। इस तकनीक के जरिए पहलगाम मार्ग को सुरक्षित कर दिया गया है। बता दें कि जम्मू से पवित्र गुफा तक सीसीटीवी कैमरों द्वारा सख्त निगरानी की जा रही है। सुरक्षा बल पूरी तत्परता के साथ कार्यरत हैं ताकि तीर्थयात्रियों को हर संभव सुरक्षा दी जा सके और यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे।

फेशियल रिकग्निशन सिस्टम की स्थापना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि जल्द ही बालटाल मार्ग पर भी यह सिस्टम स्थापित करने की तैयारी है। इस साल 3 जुलाई से शुरू होने वाली वार्षिक अमरनाथ यात्रा नौ अगस्त को रक्षा बंधन के दिन समाप्त होगी। यात्रा की अवधि भी इस बार 52 दिनों से घटाकर 38 दिन कर दी गई है।

 

तीन लाख से अधिक ने करवाया पंजीकरण
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बावजूद श्री अमरनाथ यात्रा के लिए तीन लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने पहले ही पंजीकरण करा लिया है। 22 अप्रैल को हुए उस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिसके बाद चेहरे की पहचान प्रणाली लगाना आवश्यक हो गया। अधिकारी बताते हैं कि अमरनाथ यात्रा हमेशा से आतंकवादियों के निशाने पर रही है, इसलिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम बेहद जरूरी हैं। सुरक्षा के तहत सभी वाहनों और तीर्थयात्रियों को रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान (आरएफआईडी) टैगिंग के साथ ट्रैक किया जाता है, जिससे उनकी आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जाती है।
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अमरनाथ यात्रा पर हो चुके हैं आतंकी हमले
श्री अमरनाथ तीर्थयात्रियों के दौरान पहले भी कई आतंकवादी हमले हो चुके हैं। अगस्त 2000 में नुनवन बेस कैंप पर हमला हुआ था। इसमें तीर्थयात्रियों समेत 32 लोग मारे गए। इसके बाद जुलाई 2001 में शेषनाग बेस कैंप पर हमला हुआ। इशमें 13 लोग मारे गए। 2002 में चंदनवारी बेस कैंप पर हमला किया गया, इसमें 11 तीर्थयात्री ने जान गंवा दी। जुलाई 2017 में कुलगाम जिले में अमरनाथ यात्रा के लिए यात्रियों को लेकर आई बस पर हमला हुआ। इसमें आठ तीर्थयात्री मारे गए थे।

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