श्रीनगर। आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस कार्यकर्ता पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कश्मीर दौरे को फायदेमंद नहीं मान रहे हैं। कार्यकर्ता इस बात से खफा हैं कि राहुल यहां आकर कश्मीर के असली मुद्दों को तो भूल ही गए। कार्यकर्ता इस बात की उम्मीद में थे कि राहुल या तो कोई बड़ी घोषणा करेंगे या फिर सरहद पर बने तनाव पर खुलकर बोलेंगे।
चुनावों के ठीक पहले राहुल गांधी का कश्मीर दौरा कई मायनों में पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए फायदेमंद नहीं माना जा रहा है। राहुल ने कश्मीर में तीन कार्यक्रमों को संबोधित तो किया गया, लेकिन कोई घोषणा नहीं की। इसके अलावा भारत-पाक सीमा की स्थिति पर कोई टिप्पणी नहीं करने के चलते पार्टी के भीतर ही दौरे को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। स्थानीय कार्यकर्ता राज्य के उनके दौरे को इसलिए अहम आम रहे थे कि देश के कई राज्यों में होने वाले चुनावों के प्रचार से वक्त निकाल कर राहुल यहां आए थे। उन्होंने यहां आने से पूर्व उन राज्यों में लंबा चुनाव प्रचार तो किया, लेकिन राज्य में संभावित अगले साल होने वाले चुनावों को शायद भूल गए। पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए उनकी ओर से न तो कोई लाभकारी घोषणा की गई और न ही कश्मीर समस्या और सीमा पर हालातों का जिक्र किया गया। बडगाम तथा पुलवामा में दो सभाओं में राहुल केवल स्थानीय समस्याओं का ही जिक्र कर पाए। कार्यकर्ता इस बात से भी खफा हैं कि यहां भाजपा के प्रधानमंत्री पद के घोषित उम्मीदवार नरेंद्र मोदी लाखों की भीड़ को संबोधित कर रहे हैं। वहीं, बडगाम में राहुल तथा उमर महज 500-700 महिलाओं को ही संबोधित कर पाए।