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दस दिन बाद भी आतंकी बेकाबू

Fri, 04 Oct 2013 05:40 AM IST
Sri nagar
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d अमर उजाला ब्यूरो
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श्रीनगर/जम्मू। कुपवाड़ा के केरन सेक्टर के शाला भाटा गांव में घुसपैठियों और सुरक्षा बलों के बीच दस दिन बाद भी वीरवार को मुठभेड़ जारी रही और आतंकी बेकाबू रहे। बुधवार को मुठभेड़ में घायल होने वाला एक जवान शहीद हो गया। घायल अवस्था में किरण गुरूंग (असम) को अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां वीरवार को उसने दम तोड़ दिया।
उधर, आतंकियों के साथ पाक की बार्डर एक्शन टीम के जवानों ने गांव में कब्जा कर रखा है। जिसे भारतीय जवानों ने पूरी तरह घेर लिया है। एलओसी से सटे इस गांव में धमाकों की गूंज सुनाई दे रही है। गांव के पास नियंत्रण रेखा पर भी पाक सेना की तरफ से फायरिंग की सूचना है। घुसपैठियोें के संपर्क पाकिस्तानी सेना से लगातार बने हुए हैं। सैन्य प्रवक्ता नरेश बिज का कहना है कि आतंकियों की तरफ से फायरिंग जारी है। हमारे जवान भी उनको निशाने पर ले रहे हैं। फिलहाल, हालात जस के तस हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे इलाकों में सर्च आपरेशन के लिए सेना हेलीकाप्टर का इस्तेमाल कर रही है। केरन सेक्टर में बड़े पैमाने पर घुसपैठ के बाद वीरान पड़े शाला भाटा गांव को आतंकियों ने अपनी पनाहगाह बना ली थी। आतंकियों और पाक जवानों की संयुक्त घुसपैठ के बीच पाक फौज की तरफ से एलओसी पर भी फायरिंग शुरू कर दी गई थी। सैन्य प्रवक्ता का कहना है कि गुरुवार को जरूरत के मुताबिक, सुरक्षा बलों की टुकड़ियों को वहां भेजा गया है। हालात काबू से बाहर नहीं हैं। फिलहाल, किसी घुसपैठिये का शव कब्जे में नहीं लिया जा सका है। जंगलों की निगहबानी के लिए हेलीकाप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। 30 से 50 घुसपैठियों ने 26 सितंबर को केरन सेक्टर में एलओसी पर घुसपैठ की थी। तभी से सुरक्षा बलों से मुठभेड़ चल रही है। इस दौरान घुसपैठियों ने नियंत्रण रेखा से सटे खाली पड़े गांव शाला भाटा में कब्जा जमाया और धीरे-धीरे वहां भारी मात्रा में गोला-बारूद जमा कर लिया।
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तमाम सेना शिविर अलर्ट पर ः सांबा स्थित सैन्य शिविर पर आतंकी हमले के बाद सेना ने तमाम कैंपों को अलर्ट जारी किया है। बताया जाता है कि आतंकियों का मुख्य निशाना सैन्य शिविर होने के कारण सेना अधिकारी कोई ढील नहीं बरतना चाहते। बताया जाता है कि सैन्य शिविरोें में अब प्रवेश के लिए तमाम औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ रही है। साथ ही शिविरोें में आने वाले लोगों पर खास नजर रखी जा रही है। इतना ही नहीं, सैन्य शिविरों के अंदर या पास स्थित स्कूलों पर भी चौकसी बरती जा रही है।
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