श्रीनगर। घाटी में एक मौन क्रांति आकार ले रही है। बंदूकों के साये में सिसक रहे इस इलाके में बदलाव की बयार को सहज ही महसूस किया जा सकता है। फतवों को धता बता खामोश उत्कंठा ने माहौल बदल दिया है, जिसमें लड़कियों में भी करिअर के प्रति दिलचस्पी बढ़ी है। इस बहाव की खामोश आवाज को सुना जा सकता है। यह धारा मचलती हुई विकास की मुख्य धारा से संगम को बेताब है।
खामोश विरोध के स्वर तब भी उठे थे जब आल गर्ल राक बैंड के खिलाफ फतवा जारी हुआ था। लड़कियों के गाने को मजहब के खिलाफ बताकर प्रतिबंध लगाने की मंशा कामयाब होती अब नहीं दिखती। फतवों की एक लंबी फेहरिस्त रही है। पहले लड़कियों द्वारा मोबाइल के इस्तेमाल के खिलाफ फतवा जारी करते हुए चेहरे पर तेजाब फेंकने की भी चेतावनी दी गई। अंगड़ाई लेकर मचलती विकास के अलमस्त बहाव ने इसे दरकिनार कर दिया। आज डल झील के शिकारे से लेकर निशात बाग के चबूतरों तक हर कहीं कश्मीरी लड़कियों को मोबाइल पर बात करते देखा जा सकता है। लाल चौक हो या करण नगर बाजार और सड़कों पर भी बुरके और दुपट्टा डाले कश्मीरी महिलाएं मोबाइल पर बेधड़क बातचीत करती दिखतीं हैं।
अलगाववादियों ने पर्यटकों के लिए भी ड्रेस कोड तय कर दिए थे। तंग कपड़ों के इस्तेमाल नहीं
करने की चेतावनी देते हुए पर्यटन विभाग को भी इस बाबत
ताकीद की गई थी। पिछले साल जमाते इस्लामी द्वारा जारी इस फतवे का कहीं असर नहीं दिखता। इंदौर से लेकर न्यूयार्क तक के पर्यटकों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। पर्यटन महकमे ने चुप्पी साधी लेकिन टूरिस्टों ने इसे दरकिनार
कर दिया। पर्यटक मनपसंद
पहनावे में डल झील में शिकारों
पर भ्रमण करते और मोटबोट
के सहारे वाटर स्केटिंग करते
दिख रहे हैं।
सरकारी मुलाजिम जिया उल सबा शाह कहते हैं कि अलगाव वादी संगठन वजूद का अहसास कराने को फतवे जारी करते हैं लेकिन अब खौफ उतार पर है। कश्मीरी महिलाओं के लिए ड्रेस कोड बेअसर है। श्रीनगर की सड़कों पर कश्मीरी लड़कियां जींस में तो कम ही दिखती हैं लेकिन सलवार सूट का बिंदास लिबास उन्हें भाने लगा है। कंप्यूटर पर काम करने में आसानी हो, ऐसे ड्रेस ही लड़कियों को बाते हैं।
श्रीनगर के सरायबल स्थित सर्राफा बाजार में कंप्यूटर कोचिंग इंस्टीच्यूट के बोर्ड लगे हैं। सुबह से शाम तक इन संस्थानों में कश्मीरी लड़कियों भीड़ लगी रहती है। सोफी कांपलेक्स, गोल मार्केट, करण नगर, फिरदौस सिनेमा का इलाका और आगा मस्जिद काम्पलेक्स। हर जगह मेडिकल, इंजीनियरिंग और विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारियों के लिए कोचिंग इंस्टीट्यूट खुल गए हैं। कश्मीरी लड़कियों ने इस बार यूपीएससी में भी परचम लहराया है। वह कराटे सीख रही हैं और आत्मसुरक्षा के साथ मंजिल की ओर बड़ने के लिए कदमताल भी कर रही हैं।