प्रदेश को 48 एमबीबीएस डॉक्टर मिल गए हैं। 31 मार्च को बांडधारी डॉक्टरों की बेस अस्पताल श्रीकोट गंगानाली में जेआरशिप (जूनियर रेजीडेंसी) पूरी होने के बाद विभिन्न जिलों के दुर्गम क्षेत्रों में संविदा पर नियुक्ति कर दी जाएगी। सोमवार को साक्षात्कार के माध्यम से चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने चिकित्सकों का चयन किया। चयन प्रक्रिया में सबसे अधिक डॉक्टर टिहरी जिले को मिले हैं।
राज्य के सरकारी मेडिकल कालेजों से रियायती शुल्क (सब्सिडाइज्ड सीट) एमबीबीएस करने वाले चिकित्सकों को सरकारी अस्पतालों में निर्धारित अवधि तक अनिवार्य रुप से सेवा देनी पड़ती है। इसके लिए उनसे चिकित्सा शिक्षा विभाग दुर्गम क्षेत्रों में अनिवार्य सेवा का बांड भरवाता है। बांड के अनुसार, मेडिकल कालेज में एक साल की जेआरशिप पूर्ण करने के बाद संबंधित चिकित्सक संविदा पर दुर्गम सीएचसी, पीएचसी या अन्य अस्पतालों में सेवा करते हैं।
प्रत्येक साल चिकित्सा विभाग इन चिकित्सकों की तैनाती करता है।
चिकित्सा विभाग के प्रतिनिधि अपर निदेशक डा. प्रेमलाल और चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि प्रोफेसर अमित कुमार की मौजूदगी में चिकित्सकों का साक्षात्कार संपन्न हुआ। इंटरव्यू में 48 चिकित्सक उपस्थित हुए, जबकि दो चिकित्सक पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे हैं। डा. प्रेमलाल ने बताया कि अप्रैल माह में संबंधित चिकित्सक अपनी ज्वाइनिंग सीएमओ को देंगे। तब जिला स्तर से उन्हें अस्पतालों में भेजा जाएगा।
चिकित्सकों का आवंटन
टिहरी को 19, पौड़ी को 11, नैनीताल को 7, अल्मोड़ा को 6, चंपावत को 2 और उत्तरकाशी, बागेश्वर व पिथौरागढ़ जिले को 1-1 चिकित्सक मिले हैं।