वार्षिक अमरनाथ यात्रा को सुरक्षा प्रदान करने के लिये प्रशासन ने अर्ध सैनिक बलों की 74 कंपनियों को तैनात करने का फैसला लिया।
इनमें केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल और राज्य पुलिस के जवान शामिल होंगे, जबकि सुरक्षा का दायित्व कुछ दूसरी सुरक्षा एजेंसियों पर भी रहता है।
28 जून से शुरू हो रही 55 दिनों की अमरनाथ यात्रा की तैयारियों के साथ-साथ संभावित किसी भी आतंकी खतरे को देखते हुए यात्रियों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करवाने की मुहिम भी शुरू कर दी गई है।
वैसे तो यात्रा के दौरान सुरक्षा प्रदान करने की मुख्य जिम्मेदारी राज्य पुलिस की रहती है लेकिन केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल और सीमा सुरक्षा बलों के जवानों की सेवाएं लेना राज्य प्रशासन की जरूरत बन गया है।
जम्मू से लेकर पहलगाम और बालटाल सड़क मार्ग पर केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान तैनात किये जाते हैं।
सीमा सुरक्षा बल के जवानों को दोनों पैदल यात्रा मार्गों चंदनबाड़ी से गुफा और बालटाल से गुफा तक रास्ते के दोनों तरफ तैनात किया जाता है।
इतना ही नहीं कश्मीर की स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दोनों पैदल मार्गों के साथ ही पर्वत की चोटियों पर सेना के जवानों की निगरानी रहती हैं।
पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार यात्रा को शुरू होने में अभी काफी वक्त है लेकिन बावजूद इसके प्रशासन सुरक्षा संबंधी सारी तैयारियों को पहले ही पूरी कर लेना चाहता है।
उन्होंने यात्रा के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती के लिये राज्य के बाहर से अतिरिक्त बल बुलाने से इंकार किया।
राज्य में काफी संख्या में सुरक्षा बल पहले से ही तैनात हैं, जिनका इस्तेमाल यात्रा के दौरान कड़े सुरक्षा इंतजामों के लिए किया जाएगा।