राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। जिले की कालाकोट तहसील का कम्यूनिटी हेल्थ सेटर (सीएचसी) सिर्फ दो डाक्टरों के सहारे चल रहा है।
कालाकोट के सीएचसी में डाक्टरों के 14 पद स्वीकृत हैं। जिसमें आठ असिस्टेंट सर्जन, एक डेंटल सर्जन, पांच विशेषज्ञ डाक्टर , 11 नर्सें और आठ फार्मासिस्ट के पद स्वीकृत हैं। मौजूदा समय में इस सीएचसी को केवल दो ही डाक्टर चला रहे हैं। उनमें से एक ब्लाक चिकित्सा अधिकारी है।
सीएचसी में ऑपरेशन थियेटर, लेबर रूम, लेबोरेट्री की सुविधा होने के बावजूद कई महीनों से एक भी ऑपरेशन और प्रसव नहीं किया गया है। छोटे से छोटे मामले में भी मरीजों को जिला अस्पताल या फिर जम्मू के मेडिकल कालेज रेफर कर दिया जाता है। इतना ही नहीं कालाकोट चिकित्सा ब्लाक की बात करें तो पूरे ब्लाक में करीब 13 स्वास्थ्य केंद्र किराए की दुकानों में चलाए जा रहे हैं।
इन सभी स्वास्थ्य केंद्रों को या तो कोई पैरा मेडिकल कर्मी या फिर कोई फार्मासिस्ट चला रहा है। कालाकोट के निवासी मोहम्मद शकील ने बताया कि एक तरफ राज्य सरकार लोगों के घरों तक आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने का दवा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत पूरी तरह से अलग हैं। एक अन्य निवासी राज कुमार ने कहा कि क्षेत्र के लोग गरीब होने के चलते राजोरी या जम्मू में उपचार के लिए नहीं जा पाते हैं।
यदि सरकार इन स्वास्थ्य केंद्रों में बेहतर सुविधाएं प्रदान नहीं कर सकती तो इन्हें बंद कर देना चाहिए। सुरिंद्र कुमार ने बताया कि कालाकोट के सीएचसी में सुविधाएं नहीं होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
इस बारे में राजोरी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. राजीव शर्मा ने माना कि कालाकोट सीएचसी में डाक्टरों की भारी कमी है। सीएमओ के अनुसार, विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार लिखित में डाक्टरों और अन्य पैरा मेडिकल कर्मियों के रिक्त पदों को भरने के लिए कहा गया है, लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।