होली के पावन पर्व को लेकर शहर में निकाली जाने वाली भैरव नाथ की ऐतिहासिक झांकी शुक्रवार को धूमधाम से निकाली गई। सुबह से ही नाबन मोहल्ला स्थित बाबा भैरव नाथ के मंदिर में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया।
परंपरानुसार दोपहर बाद करीब तीन बजे पूजा-अर्चना के साथ बाबा भैरव की झांकी निकलते ही शहर का वातावरण भक्तिमय हो गया। भैरवनाथ का नृत्य देखने और भैरव के हाथ से चिमटे की मार खाने के लिए मानो होड़ लगी हुई थी।
महिलाएं, युवतियां, बच्चे सभी भैरव नृत्य देखने के लिए उमड़ पड़े। इस मौके पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त थे। ढोल-नगाढ़ों की थाप पर भैरव नाथ का वेश धारण किए युवा नृत्य करते शहर के सनातन धर्म सभा मंदिर से होते हुए मुख्य बाजार सिटी चौक से पुराने बस अड्डे पहुंचे।
पुराने बस अड्डे से झांकी वापस भैरव मंदिर में संपन्न हुई। राजोरी वासियों का ऐसा मानना है कि जिस वर्ष होली के पर्व पर शहर में भैरव झांकी न निकाली जाए, उस वर्ष शहर व आसपास के क्षेत्रों में अकाल पड़ने जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।
पिछले कई दशकों से यह परंपरा बिना किसी रुकावट के चलती आ रही है। वहीं लोगों की मान्यता है कि भैरव नाथ के चिमटे की मार से कई प्रकार के शारीरिक कष्ट दूर होते हैं और लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस मौके पर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए थे।