जिले में कई दिनों से पाक सेना द्वारा की जा रही गोलाबारी से नियंत्रण रेखा से सटे ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों में भारी दहशत का माहौल बना हुआ है। जहां नियंत्रण रेखा से सटे गांव के लोग दिन भर अपने घरों के अंदर दुबके रहते हैं। वहीं कई गांवों के ग्रामीण शाम ढलते ही अपने बच्चों के साथ कई किलोमीटर दूर अपने रिश्तेदारों के यहां चले जाते हैं।
जहां रात बिताने के बाद तड़के अपने घरों में पशुओं की देखभाल और अन्य कामों को निपटाने के लिए पहुंच जाते हैं। जिले के साब्जियां सेक्टर में नियंत्रण रेखा से सटे पाक सेना की गोलाबारी के सीधे निशाने पर उढ़ीपुरा और गगड़ियां गांवों के ग्रामीण सुरैया बेगम, परमीन अख्तर, मुश्ताक अहमद, सलाम दीन आदि का कहना है कि 2002 के बाद हम लोग काफी शांति से अपने घरों में रह रहे थे, लेकिन इस साल तो पाक सेना ने सारी हदें ही पार कर दी हैं, जो उसने ग्रामीण क्षेत्रों को निशाना बना कर गोलाबारी करनी शुरू कर दी है।
पहले तो नियंत्रण रेखा पर सेना की चौकियों को निशाना बनाकर गोलाबारी की जाती थी, अब हम गरीब लोगों को भी निशाना बनाया जा रहा है।इन लोगोें का कहना है कि हमारे गांव के अधिकतर लोगों के रिश्तेदार यहां से करीब पांच किलोमीटर दूर डन्नागांव, जोकि पाक गोलाबारी की जद से बाहर है, वहां रहते हैं।
हम लोग जैसे ही शाम ढलती है तो अपने बच्चों को लेकर घरों को बंद कर निकल जाते हैं, क्योंकि दिन के समय गांव से बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं होता है। पाक सेना के जवान हमें कभी भी निशाना बना सकते हैं। अंधेरा होने के साथ हम घरों को छोड़ देते हैं और उजाला होने के पहले गांव में लौट आते हैं।
क्योंकि एक तो घरों में गाय, भैंसें, बकरियां होती हैं। उनका दूध निकालना और उन्हें चारा खिलाना होता है। साथ ही इन दिनों हम लोगों को अपने साल की कमाई राजमा, मक्की और घास की कटाई भी करनी होती है।ग्रामीणों का कहना था कि हर समय मौत का साया हम पर मंडराता रहता है। बच्चे खुले में खेल नहीं पाते न ही स्कूल जा पाते हैं। क्योंकि दो दिन पहले पाक सेना द्वारा रात में की गई गोलाबारी से हमारे घरों के अंदर रखे सामान तक क्षतिग्रस्त हो गए थे।