एलओसी पर बार-बार पाक की तरफ से सीजफायर के उल्लंघन सेे जहां एक तरफ सेना के जवानों को निशाना बनाया जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ नियंत्रण रेखा के बच्चों का भविष्य मेें अंधकार की ओर बढ़ रहा है।
जिन बच्चों के हाथाें में पुस्तकें होनी चाहिए थीं, उनके हाथों में पाक सेना के दागे गए मोर्टार शेल हैं। नियंत्रण रेखा से सटे इलाकाें के अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हैं।
लोगों ने केंद्र की मोदी सरकार से गुहार गलाते हुए कहा कि ऐसे कड़े कदम उठाए कि पाक को हमेशा के लिए सबक सिखाया जाए। जिले की मंजाकोट तहसील के एलओसी से सटे तरकुंडी, नैैका, पंजग्राई, प्रयाली, गंभीर आदि क्षेत्रों के लोग गोलीबारी के डर से अपने बच्चों को हर रोज स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं।
स्थानीय निवासी मोहम्मद अकबर, मोहम्मद शब्बीर, मुश्ताक अहमद, अब्दुल रज्जाक आदि ने बताया कि उन्हें पता नहीं होता कि कब गोलाबारी शुरू हो जाए और कोई मोर्टार शेल उनके बच्चों को अपना निशाना बना ले।
इस डर के चलते वह लोग अन्य अभिभावकों की तरह अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं। बच्चे परिवार के अन्य सदस्यों के साथ दिन भर अपने घरों में दुबके रहते हैं। लोगों ने कड़ा रोष प्रकट करते हुए कहा कि उन्होंने तो अपना सारा जीवन ऐसे ही डर और खौफ में व्यतीत कर दिया है। अब उन्हें लग रहा है कि उनके बच्चे भी जीवन में कुछ नहीं कर पाएंगे।
बच्चे रोज स्कूल नहीं जा पाते हैं, तो उनकी पढ़ाई कैसे पूरी होगी। हालांकि प्रशासन और शिक्षा विभाग ने स्कूलों ंमें छुट्टियां तो नहीं की हैं और स्कूल लग रहे हैं, लेकिन गोलाबारी के डर के मारे अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं।
आलम यह है कि 10वीं, 12वीं और 8वीं की बोर्ड की कक्षाओं के विद्यार्थी भी स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ऐसे में बोर्ड की कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई अन्य विद्यार्थियों से पीछे छूट रही है।
फरवरी के महीने में बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हो जाती हैं, लेकिन नियंत्रण रेखा के स्कूलों के बच्चों ने अभी तक बोर्ड का आधा सिलेबस भी नहीं पढ़ा है। उल्लेखनीय है कि भारतीय सेना ने पाक के आतंकवादियों के लांचिंग पैड पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाक अब तक दर्जनों बार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर चुका है।
पिछले करीब दो महीनों से नियंत्रण रेखा के बच्चे स्कूल लगातार नहीं जा पाए हैं।