राजोेरी। उपायुक्त राजेश के. शवन ने प्रवासी आदिवासी आबादी की गणना और सर्वेक्षण के संबंध में अधिकारियों के साथ मंगलवार को बैठक की। इसमें सर्वेक्षण के लिए तैयार किए गए प्रारूपों में प्रवासन मार्ग, परिवार का विवरण, शैक्षिक स्थिति, स्वास्थ्य और पशुपालन सुविधाएं, आजीविका और कौशल की आवश्यकता सहित अन्य मापदंडों से संबंधित विवरण दर्ज करने का निर्देश दिया
उपायुक्त ने बताया कि एडीसी पवन कुमार को सर्वेक्षण के लिए नोडल अधिकारी नामित किया गया है, जबकि जिला मूल्यांकन अधिकारी बिलाल राशिद को समन्वय अधिकारी नियुक्त किया गया है। जो कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण भी आयोजित करेंगे और आईईसी गतिविधियों का संचालन करेंगे। उपायुक्त ने बताया कि सर्वेक्षण के आधार पर विभाग की तरफ से विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जिनमें पारगमन सुविधाएं, पशुधन सेवाएं, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, आजीविका पहल, आवश्यक सेवाएं और बुनियादी ढांचा शामिल है।
उपायुक्त ने बताया कि परिवार के पूर्ण होने पर डिजिटलीकरण एवं स्मार्ट कार्ड सहित संपूर्ण पारिवारिक विवरण की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। आदिवासी प्रवासी आबादी को दी जाने वाली सुविधाओं की एक श्रृंखला के लिए स्मार्ट कार्ड कई उद्देश्यों की पूर्ति करेंगे आदिवासी मामलों का विभाग विभिन्न योजनाओं के तहत प्रवासी खानाबदोश परिवारों को सहायता प्रदान करेगा और योजना में खानाबदोश आबादी की क्षमता निर्माण भी शामिल है। विशेष तहसील स्तरीय समितियों का गठन किया गया है और आदिवासी आबादी की गणना और सर्वेक्षण के लिए और संबंधित तहसीलदारों को जिले की प्रवासी आदिवासी आबादी की गणना और सर्वेक्षण के लिए नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया गया है और शिक्षा, वन, ग्रामीण विकास विभाग और पशु और भेड़पालन विभाग जनजातीय आबादी के संबंध में आवश्यक डेटा एकत्र करने की प्रक्रिया में राजस्व विभाग की सहायता करेगा।
उपायुक्त ने कहा कि सर्वेक्षण इस वर्ष 1 जुलाई से शुरू होगा और इस डेटा संग्रह प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। वहीं एडीसी ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने के लिए कहा कि प्रारूप के अनुसार संपूर्ण डेटा संग्रह 21 जुलाई तक पूरा हो जाए। ताकि इसे उच्च अधिकारियों को उनके स्तर पर आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किया जा सके।