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Rajouri News: रेहतल चौधरीनार की महिलाओं ने पैकेजिंग में खुद को बनाया आत्मनिर्भर

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स्वयं सहायता समूह की सदस्य पैक्ड उत्पादों के साथ। - फोटो : rajori news
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राजोरी। पंचायत रेहतल चौधरीनार ग्रामीण सशक्तीकरण के एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। गांव की महिलाओं ने पैकेजिंग के काम में खुद को आत्मनिर्भर बनाया। शुरू में समूह ने मिर्ची और हल्दी जैसी बुनियादी वस्तुओं की पैकेजिंग का काम शुरू किया। समय के साथ अब चीनी की भी पैकेजिंग की जा रही है। आने वाले समय में तेल और सूखे मेवों की पैकेजिंग की भी योजना है।
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इन महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण रूरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टिट्यूटस (आरएसईटीआई) की तरफ से दिया गया। बैंकों से ऋण दिलाने में मदद की। अब ये महिलाएं उत्पादों की पैकेजिंग कर अपने घर का गुजारा कर रही हैं। महिलाएं 2 से 3 हजार रुपये महीना कमा रही हैं। इस समय गांव में 30 महिलाएं पैकेजिंग का काम रही हैं। ये काम दो से तीन घंटे का होता है। एक सदस्य केवल 30 मिनट के भीतर 50 किलोग्राम चीनी पैकेज करने में सक्षम है।

दो से तीन हजार रुपये महीना कमा रहीं
सेल्फ हेल्प ग्रुप में शामिल नाजिया अख्तर ने बताया कि उन्हें प्रशिक्षण रूरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टिट्यूटस (आरएसईटीआई) की तरफ से दिया गया। अन्य महिला तजीम अख्तर ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों को ऋण प्रदान करने में जेएंडके बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, ग्रामीण बैंक, देहाती बैंक, कैनरा बैंक ने सक्रिय भूमिका निभाई। कमरुनीसा ने बताया कि उनके पास पैकिंग के लिए चीनी कोआपरेटिव सोसाइटी से आती है। चीनी को पैक कर मार्किट मे भेजते हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय मे मसाले, अखरोट, काजू आदि की पैकिंग का काम भी किया जाएगा। जरूरतमंद महिलाए केवल 2 से 3 घंटे तक ही काम करती हैं और महीने मे 2000 से 3000 रुपए तक कमा लेती हैं।
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