अध्ययन बताते हैं कि इंजेक्शन सबसे पसंदीदा गर्भ निरोधकों में से है।
मार्च के महीने में हो रही मूसलाधार बारिश से एक तरफ सब्जियों व अन्य फसले बर्बाद हो गई है, जबकि महामारी फैलने लगी है। पिछले कुछ दिनों से जिले के अधिकतर क्षेत्रों में महामारी के मामले बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल के अलावा अन्य अस्पतालों में हर रोज मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
पेचिश, उल्टी, पेट दर्द, अपच के अधिक मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञ डाक्टरों का मानना है कि मूसलाधार बारिश के बाद जमीन में समा जाने वाला पानी ही महामारी का असली कारण है। दूषित पेयजल का प्रयोग करने से अधिक लोग महामारी का शिकार हो रहे हैं।
जिला अस्पताल की बात करें तो पिछले तीन दिनों में दर्जनों के हिसाब से महामारी से ग्रस्त मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। अधिक मामले पेचिश व उल्टी के सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही पेट दर्द और अपच के भी शिकार लोग जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिले के पहाड़ी इलाकों में भी महामारी के मामले सामने आ रहे हैं।
बुद्धल, थन्नामंडी, दरहाल कोटरंका आदि तहसीलों के अस्पतालों में हर रोज महामारी के मरीज पहुंचने के समाचार मिल रहे हैं। वहीं मरीजों के उपचार के साथ उबला हुआ पेयजल प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है।
चिकित्सक विशेषज्ञ डा. जमील खान के अनुसार महामारी से बचने के लिए लोगों को उबला हुआ पेयजल प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा पेयजल में क्लोरीन की गोलियंा डाल कर भी पेयजल को पीने योग्य बनाया जा सकता है। जिला मास मिडिया अधिकारी डा. सादिक खान ने इस संबंध में बताया कि जिले के सभी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में क्लोरीन की गोलियां उपलब्ध हैं।
दूषित पेयजल के प्रयोग से होने वाली बीमारियों को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। महामारी से बचने के लिए लोग उबला हुआ पेयजल व क्लोरीन की गोलियों वाला पेयजल प्रयोग करें। जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. अनीस का कहना है कि जिला अस्पताल मे पहुंच रहे मरीजों को अधिक ग्लूकोज लग रहा है। मरीजों के उपचार के साथ उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है।