नौशेरा। 1947-48 के युद्ध के दौरान, जब पाकिस्तानी कबाइलियों ने नौशेरा पर आक्रमण किया, तब भारतीय सेना के वीर योद्धा नायक जदुनाथ सिंह ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपनी टुकड़ी के साथ मोर्चा संभाला।
तीन बार दुश्मनों के हमले को विफल करने वाले नायक जदुनाथ सिंह ने तब तक लड़ाई जारी रखी जब तक उनके पास गोलियां रहीं। मगर जब गोलियां खत्म हो गईं, तो वे अकेले ही दुश्मनों से भिड़ गए और वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी अद्वितीय बहादुरी और बलिदान के सम्मान में भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया। उनकी वीरता आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। संवाद