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जिले के बुद्धल स्थित सरकारी पब्लिक हेल्थ सेंटर को सरकार द्वारा राम भरोसे छोड़ दिया गया है। 24 घंटे खुली रहने वाली सरकारी पीएचसी में डाक्टरों व अन्य पेरा मेडिकल कर्मियों के स्वीकृत 36 पदों में से 21 पद रिक्त पड़े हैं। इस बात का खुलासा उस समय हुआ जब नायब तहसीलदार बुद्धल ने पीएचसी में औचक छापेमारी की।
नायब तहसीलदार खुर्शीद तांत्रे के औचक दौरे के दौरान पीएचसी में केवल एक डाक्टर व एक एनओ ही हाजिर मिला। जांच करने पर पाया गया कि पीएचसी के करीब 13 कर्मचारी बिना अनुमति के ड्यूटी से गैर हाजिर हैं। गैर हाजिर कर्मियों में डाक्टर भी शामिल थे। रिकार्ड खंगालने पर पाया कि एटेंडेंस रजिस्टर पर गैर हाजिर कर्मियों के खाने खाली रखे गए हैं, ताकि समय मिलते ही उनकी हाजिरी लगाई जा सके। नायब तहसीलदार द्वारा हाजिर डाक्टर से गैर हाजिर कर्मियों बारे पूछे जाने पर वह कोई जवाब नहीं दे पाए।
वहीं जांच करने पर पाया कि सरकारी पीएचसी में स्वीकृत 36 पद हैं और उनमें से केवल 15 ही भरे गए हैं। डाक्टरों व अन्य पेरा मेडिकल कर्मियों के 21 पद रिक्त पड़े हैं। जो कर्मचारी व डाक्टर पीएचसी में नियुक्त किए गए हैं, वह भी हर रोज ड्यूटी पर हाजिर नहीं होते और गरीब जनता को राम भरोसे छोड़ दिया गया है।
वहीं, इस प्रकार से लापरवाही बरतने और ड्यूटी से गैर हाजिर रहने का कड़ा नोटिस लेते हुए नायब तहसीलदार ने डीसी राजोरी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को रिपोर्ट पेश कर सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शुक्रवार को बुद्धल में एक टेंपू के सड़क हादसे में 12 यात्री घायल हुए थे। उपचार के लिए उन्हें बुद्धल की पीएचसी में भर्ती किया गया था। पीएचसी में डाक्टरों व अन्य कर्मियों की गैर हाजिरी के चलते सभी 12 घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया था।
उनमें से एक घायल ने रास्ते में और एक ने जिला अस्पताल पहुंचने पर दम तोड़ दिया था। लोगों का डॉक्टरों और अन्य स्टाफ रोष फुट पड़ा। जिसके बाद ही नायब तहसीलदार बुद्धल ने रविवार को पीएचसी का औचक दौरा किया।