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प्रभु श्रीराम का विवाह पूर्ण होते ही चारों दिशाओं में प्रसन्नता का वातावरण व्याप्त हो गया

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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा त्रियाठ मे श्रीराम कथा करती साध्वी सुश्री सौम्या भारती
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नौशेरा। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ से त्रियाठ में चल रही श्रीराम कथा में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सौम्या भारती ने शुक्रवार को श्रीराम विवाह उत्सव प्रसंग सुनाया। साध्वी ने बताया कि जब प्रभु श्रीराम का विवाह पूर्ण हुआ तो चारों दिशाओं में प्रसन्नता का वातावरण व्याप्त हो गया। हर कोई एक दूसरे को बधाई देने लगा। अयोध्या नगरी और जनकपुरी में सभी लोग अत्यंत हर्षित थे। जब प्रभु अयोध्या में पहुंचे तो अयोध्या वासियों ने प्रसन्नता पूर्वक प्रभु राम और माता जानकी का स्वागत किया और उनके दर्शन का आनंद प्राप्त किया।
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साध्वी ने बताया कि विवाह की यह परंपरा हमारी सनातन संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें गूढ़ अध्यात्मिक रहस्य भी छिपे हैं। जैसे दूल्हा यहां पर परमात्मा का और दुल्हन आत्मा का प्रतीक है, और विद्वान ज्ञानी पंडित जिनकी अगुवाई में विवाह रस्म पूर्ण होती है, वह एक पूर्ण सतगुरु के प्रतीक हैं, जिस प्रकार से विवाह कीर्तन अग्नि के फेरों के साथ पूरी होती है। इसी प्रकार से एक पूर्ण सतगुरु मानव के भीतर प्रभु के सनातन रूप ज्योति को प्रगट कर देते हैं। अर्थात दर्शन करा देते हैं, और मनुष्य की आध्यात्मिक यात्रा का शुभारंभ हो जाता है। एक पूर्ण सतगुरु की पहचान बताते हुए साध्वी ने कहा कि जो मानव हृदय में दिव्य दृष्टि को खोल कर प्रभु के दिव्य अलौकिक प्रकाश रूप का दर्शन तत्क्षण करा दे, उसे ही शास्त्रों में पूर्ण सतगुरु कहा गया है।
प्रभु प्राप्ति हेतु प्रभु दर्शन से प्रभु प्राप्ति की यात्रा के लिए ऐसे पूर्ण सतगुरु की तलाश नितांत आवश्यक है। कार्यक्रम के दौरान स्वामी सुचेता नंद, स्वामी हरिदासानंद, अरुण शर्मा बीडीसी सुंदरबनी, विनोद शर्मा, सतीश कुमार, कमल कुमार जेसीओ आर्मी, मोहनलाल, विजय शर्मा रिटायर्ड सूबेदार आदि विशेष तौर पर मौजूद रहे।
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