राजोरी। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की तमाम कवायदों के बावजूद बसों में ओवरलोडिंग नहीं थम रही है। मुसाफिर छतों और बस के पीछे लटककर सफर करते देखे जा रहे हैं। शहर से पलमा, दरहाल, थन्नामंडी, मंजाकोट जाने वाले मार्ग पर ऐसा नजारा आम है।
इधर, लोगों का कहना है कि इन क्षेत्रों में वाहनों की कमी भी ओवरलोडिंग का एक बड़ा कारण है। लोगों का कहना है कि उन्हें घर पहुंचने की जल्दी होती है, ऐसे में किसी हाल में सफर करना होता है। पलमा मार्ग पर बेतरतीब यात्रा करने वालों से पूछा गया तो उनका कहना था कि पलमा तक चार से छह घंटे तक का सफर है, जब कि मेटाडोर एक। ऐसे में उन्हें घर तो जाना ही है। शहर से बकोरी व रेहान जा रहे यात्रियों का भी कुछ ऐसा ही जवाब था। ओवरलोडिंग के कारण राजोरी से बुद्दल, बकोरी, रेहान, मंजाकोट, थन्नामंडी मार्गों पर पिछले साल कई हादसे हो चुके हैं। इस बारे विभाग के सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी शम्मी शर्मा का कहना है कि यहां अधिक ट्रांसपोर्टर छोटे वाहन नहीं लेते हैं। जिनके पास वाहन हैं, वह बड़ी बसें हैं। मेटाडोर कम होने से कम दूरी के मार्गों पर पर वाहनों की कमी है।