पुंछ। जनवरी का पहला हफ्ता बीत जाने पर भी बारिश एवं बर्फबारी न होने से जिले में लोग सूखी ठंड से होने वाले रोगों की चपेट में आ रहे हैं। सांस, खांसी, जुकाम और फेफड़ों की बीमारी के मरीजों में बच्चों एवं बुजुर्गाें की संख्या अधिक है। हर दिन राजा सुखदेव सिंह जिला अस्पताल की ओपीडी में पर्ची बनवाने वालों की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। लंबे इंतजार के बाद पर्ची मिल रही है।
वहीं चिकित्सकों के पास भी बीमार लोगों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। सभी वार्ड मरीजों से भरे हुए हैं। सबसे अधिक भीड़ चिल्ड्रन वार्ड में देखने को मिल रही है, जहां एक-एक बैड पर दो से तीन बच्चों काे भर्ती कर उनका उपचार किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार बारिश एवं बर्फबारी न होने के कारण सूखी सर्दी के चलते इन दिनों अस्पताल में आने वाले रोगियों की संख्या में तीस प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो गई है जिसको लेकर अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।
राजा सुखदेव सिंह जिला अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. जुल्फकार अली का कहना है कि बारिश और बर्फबारी न होने से सांस, फेफड़ों और छाती के रोगियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो रही है। सभी चिकित्सकों को ओपीडी में भी ड्यूटी से अधिक समय तक मौजूद रहने और हर मरीज की जांच करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही देश में फिर से सामने आ रहे कोरोना के मामलों को देखते हुए सचेत रहने एवं किसी मरीज में ऐसे लक्षण दिखाई देने पर उसका कोरोना टेस्ट करवाने के लिए भी कहा जा रहा है। हर दिन पांच छह लोगों के टेस्ट हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हर दिन तीस प्रतिशत से अधिक आने वाले रोगियों में बच्चों एवं बुजुर्गों की संख्या अधिक रहती है। इन दिनों बच्चों में सबसे अधिक सांस एवं छाती के रोग देखने को मिल रहे हैं, जिसे निमोनिया इन्फेक्शन कहा जाता है। डॉ. जुल्फकार अली का कहना है कि इस मौसम में हर किसी को सर्दी से बचाव के लिए अपनाए जाने वाले उपायों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। बच्चों एवं बुजुर्गों को अच्छी तरह गर्म कपड़ों का प्रयोग करने के साथ सुबह-शाम घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। साथ ही इन दिनों करीब करीब हर घर में सर्दी से बचने के लिए रूम हीटर, अंगीठी और कांगड़ी का प्रयोग किया जाता है। ऐसे में जब कोई गर्म कमरे से एक दम बाहर निकलता है तो वह सर्दी से होने वाले रोगों की चपेट में आ जाता है। इसलिए हमें ऐसा करने से पूरी तरह बचना चाहिए। एकदम गर्म वातावरण से खुले में न निकलें।
उधर अस्पताल में एक एक बैड पर दो तीन बच्चों को एक साथ भर्ती किए जाने को लेकर बच्चों के परिजनों नसीम अख्तर, अजहर महमूद, सकीना बी आदि का कहना है कि बीमार बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण हमें अस्पताल में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन हमारे पास और कोई विकल्प भी नहीं है। कम से कम अस्पताल में बच्चों को भर्ती करने पर उन्हें समय पर टीके, ऑक्सीजन और नैबुलाइजेशन की सुविधा तो मिल रही है।
चाइल्ड स्पेशलिस्ट के साथ ही नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञों के पास भी बीमार बच्चों की भीड़ जुट रही है। जिसे लेकर डॉ माजिद का कहना है कि सर्दी, खांसी, जुकाम होने से बच्चों में कान एवं गला दर्द की शिकायतें बढ़ जाती हैं जिसके चलते हमारे पास भी उपचार के लिए हर दिन बड़ी संख्या में बच्चे पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को कान एवं गला दर्द की शिकायत से बचाने के लिए उन्हें हर समय टोपी पहना कर रखनी चाहिए। साथ ही उन्हें हल्का गर्म पानी पीने को देना चाहिए और बच्चों को ठंडी हवा लगने से भी बचा कर रखना चाहिए। इस बार अभी तक बारिश एवं बर्फबारी न होने के कारण जिले में भारी मात्रा में पाला गिर रहा है जिसके कारण मुंह और नाक से सर्दी सीधे फेफड़ों में चली जाती है। ऐसे में दवाइयों के साथ ही बचाव की सबसे अधिक जरूरत है।