केंद्र व राज्य सरकार ने खेल और खिलाडि़यों के विकास के लिए तमाम योजनाएं चालू करने के दावे करती है लेकिन इस सब से उलट जिले में पांच साल बीत जाने के बाद भी इंडोर स्टेडियम का काम पूरा नहीं हुआ। जिसके चलते खिलाडि़यों को खुले में अभ्यास करना पड़ रहा है।
इंडोर स्टेडियम न होने की वजह से जिले में वेटलिफ्टिंग, जूडो, कराटे आदि खेल में युवाओं का रुझान कम होता जा रहा है। दरअसल पांच वर्ष पहले इंडोर स्टेडियम की नींव रखी गई थी। अभी तक एक करोड़ रुपये खर्च होने के बाद स्टेडियम का काम पूरा नहीं हुआ। हालाकिं स्टेडियम के भवन का निर्माण बीते वर्ष पूरा हो गया था।
लेकिन स्टेडियम बनाने वाले ठेकेदार ने मुख्य द्वार पर अस्थायी गेत लगाकर उस पर ताला जड़ दिया है। वेटलिफ्टर विनोद कुमार, अजय कुमार, अब्दुल मजीद का कहना है कि इंडोर स्टेडियम न होने के कारण आज इस खेल में भाग लेने वाला कोई खिलाड़ी ही नहीं है अधिकतर लोग इसे छोड़ चुके है ओर एक छोटे से कमरे में पड़ा सामान बर्बाद हो रहा है।
वे लोग बार-बार इस इंडोर स्टेडियम के सिलसिले में जिला प्रशासन से लेकर नेताओं तक से मुलाकात कर चुके हैं लेकिन किसी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2009 में तत्कालीन मंत्री आरएस चिब और सांसद मदन लाल ने इस इंडोर स्टेडियम की नींव रखी थी। लेकिन मौजूदा समय में फंड के अभाव में स्टेडियम का काम रुका पड़ा है।