पुंछ। पिछले कई दिनों से पाकिस्तानी सेना की तरफ से नियंत्रण रेखा पर की जा रही भारी गोलाबारी के बाद हर समय मौत के साए में जी रहे नियंत्रण रेखा के गांवों के लोगों में बंकर नहीं बनने से केंद्र की मोदी सरकार के प्रति भारी रोष है। सलोत्री में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की गोलाबारी से खफा ग्रामीणों ने कहा कि क्या केंद्र सरकार एलओसी के गांवों में और लाशें गिरने का इंतजार कर रही है। आखिर जब आए दिन गोलाबारी हो रही है तो बंकर क्यों नहीं बनवाए जा रहे हैं।
गांव सलोत्री निवासी मोहम्मद हुसैन, जहांगीर अहमद, मोहम्मद सादिक आदि ग्रामीणों का कहना था कि क्या पाकिस्तानी गोलों से हमारे मारे जाने के बाद हमारे घरों के पास बंकर बनवाए जाएंगे। सरकार की घोषणा के डेढ़ साल बाद भी गांव में अथवा घरों के पास एक भी बंकर बन कर तैयार नहीं हुआ है। ऐसे में जब भी पाकिस्तानी गोलाबारी होती है तो हमारे परिवारों की जान जाने का खतरा बना रहता है। सलोत्री गांव में पाकिस्तानी गोलाबारी में एक ही परिवार के तीन सदस्यों के मारे जाने के पीछे बंकरों के निर्माण की मंदगति का आरोप लगाते हुए क्षेत्र के पूर्व सरपंच मोहम्मद आजम, मोहम्मद जुनेद का कहना था कि अगर मोहम्मद यूनिस के घर के पास बंकर बना होता तो उसके दो मासूम बच्चे और पत्नी नहीं मारे जाते। इनका कहना है कि हम जिला प्रशासन और सरकार से मांग करते हैंकि वह बंकरों के निर्माण का काम ठेकेदारों से वापस लेकर हमें ठेकेदारों को बंकर बनाने के लिए दिए जाने वाले पैसों में से आधे पैसे दिए जाएं हम खुद पांच सात दिनों में अपने घरों के पास मजबूत बंकरों का निर्माण करवा लेंगे। एक तो ठेकेदार बंकरों के निर्माण में महीनों लगा रहे हैं, क्योंकि एक-एक ठेकेदार के पास 30 से 50 बंकरों का ठेका है। वह जहां गाड़ी जाती है, वहां जेसीबी मशीन लगा कर गड्ढा खोद कर चले जाते हैं। उसके बाद महीनों बंकर का काम शुरू नहीं हो पाता है।
इतना ही नहीं ठेकेदारों को बंकरों के निर्माण से अपने लिए पैसा बचाना है तो वह निर्माण कार्य में गुणवत्ता को भी ताक पर रख सकते हैं, जबकि हम खुद अपने बाल बच्चों की जान बचाने के लिए बनाए जाने वाले बंकरों को अधिक से अधिक मजबूत बनाने का प्रयास करेंगे। चाहे हमें अपनी जेब से ही दस बीस हजार रुपये क्यों न लगाने पड़ें। सलोत्री के ग्रामीणों ने अपनी यह बात राज्य विधान सभा के स्पीकर के सामने भी रखी है। इस पर उन्होंने बंकरों के निर्माण का काम किसी अन्य एजेंसी को देने का आश्वासन भी दिया है। कुछ लोगों का यहां तक कहना था कि सरकार हमें जंगलों से लकड़ी काटने की अनुमति दे दे तो हम खुद ही बिना सरकार सहायता के कच्चे मिट्टी की छत वाले मजबूत बंकर बना लेंगे।
गौरतलब है कि सरकार की तरफ से पुंछ जिले के लिए 688 सामुदायिक और 500 निजी बंकरों को गत वर्ष मंजूरी दी गई थी। दो दिन पहले 200 और निजी बंकर मंजूर किए गए हैं। इससे जिले में कुल 700 निजी बंकरों का निर्माण करवाया जाना है। जिले में कई निजी और सामुदायिक बंकरों का निर्माण कार्य जारी है।