पुंछ। नियंत्रण रेखा के जलास सेक्टर के भेरा में अभ्यास के दौरा दुर्घटनावश राकेट लांचर में धमाका होने से सेना की 14 महार रेजिमेंट के दो जवानों के गंभीर रूप से घायल हो जाने और एक साथी के उपचार के दौरान शहीद होने की घटना के बाद शहीद जवान के साथियों के आंसू थम नहीं रहे हैं।
इस हादसे ने इन जवानों को अंदर तक हिला के रख दिया है, क्योंकि एक पल में वो सब हो गया कि एक साथी उन्हें सदा के लिए छोड़ कर चला गया, और एक साथी जीवन मृत्यु के बीच संघर्ष करते हुए उधमपुर पहुंच गया है। देर शाम तक भूखे प्यासे यह जवान अपने साथियों के साथ सिर से पांव तक भीगे हुए पहले सैन्य अस्पताल और बाद में जिला अस्पताल में शहीद साथी के पार्थिव शरीर को उसके घर भेजने के पूर्व कानूनी प्रक्रिया पूरी कराने के लिए दौड़ धूप करते हुए नजर आए।
इन जवानों का कहना है कि सुबह से सब कुछ सही प्रकार चल रहा था। बस राकेट लांचर दागने का अभ्यास समाप्त होने वाला था। बस आखिरी राकेट दागना बाकी था कि न जाने कैसे यह हादसा हो गया और दुर्घटनावश धमाका होने से मुकेश कुमार और ऋषिकेश चौबे उसकी चपेट में आ गए। उनके घायल होने के बाद जैसे ही उन्हें वहां से सैन्य अस्पताल पहुंचाने का क्रम शुरू किया, तो बरिश होने लगी। बारिश में ही हम सब इस आशा से भाग दौड़ करते रहे कि हमारे इन साथियों की जान बच जाए, परंतु न जाने ऊपर वाले को क्या मंजूर था, जो चौबे जी वीरगति को प्राप्त कर गए।
कुछ साथियों का कहना है कि अभी तो ऋषिकेश चौबे की उम्र ही क्या थी। सिर्फ 24 वर्ष, परंतु वह हंसमुख एवं सबको सम्मान देने वाला था। अभी कल ही हमने ड्यूटी के उपरांत एक साथ चाय के साथ गपशप की थी। इतना कहते ही अपनी भर आई आंखों को छुपाते हुए शहीद का साथी जवान कुछ दूर खड़ी एंबुलेंस, जिससे शव को पोस्टमार्टम के लिए लाया था उसके पीछे चला जाता है।