जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से हिजबुल मुजाहिदीन सरगना सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटों समेत 11 लोगों को सरकारी नौकरी से बर्खास्त किए जाने के मामले में घाटी में सियासत तेज हो गई है। नेकां और पीडीपी के बाद अब हुर्रियत कांफ्रेंस ने भी बर्खास्तगी को वापस लेने की मांग की है।
नेकां-पीडीपी ने कार्रवाई की निंदा की थी। ज्ञात हो कि इन सभी कर्मचारियों को देश विरोधी गतिविधियों तथा आतंकी संगठनों से गठजोड़ के आरोप में सरकार ने बर्खास्त किया है। मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाली हुर्रियत कांफ्रेंस ने प्रशासन से कहा कि हाल में बर्खास्त किए गए 11 कर्मचारियों को वापस लिया जाए या उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों को चुनौती देने के लिए उन्हें एक मौका दिया जाए।
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हुर्रियत के प्रवक्ता ने कहा कि इस कार्रवाई पर हुर्रियत कड़ी आपत्ति दर्ज कराता है और 11 सरकारी अधिकारियों की बर्खास्तगी की निंदा करता है। इस तरह से अब तक 20 से ज्यादा लोगों को सेवा से निकाल दिया गया है।
देश की सुरक्षा की आड़ में यह न्याय और निष्पक्षता के सभी नियमों के विरुद्ध किया गया काम है। इस प्रकार की अविवेकपूर्ण कार्रवाई से नौकरी कर रहे लोगों में भी डर बैठ गया है और वे अपने भविष्य के प्रति चिंतित हैं।