राजनीतिक हत्याएं होती नहीं, कराई जाती हैं...
आतंकियों ने भाजपा के तीन नेताओं को मार दिया है। इसके पीछे भी राष्ट्र विरोधी ताकतें काम करती हैं। ब्रिगेडियर गुप्ता बताते हैं, राजनीतिक हत्याएं होती नहीं हैं, बल्कि कराई जाती हैं। ये किसी से छिपा नहीं है कि कौन लोग आतंकियों व अलगाववादियों की भरपूर मदद करते रहे हैं। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट बहुत कुछ कहती है।
राजनीति को खानदानी राज समझने वालों के दिन अब चले गए हैं। जब से ये लोग रिहा हुए हैं, तभी से घाटी में राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर हमले बढ़ गए हैं। जम्मू-कश्मीर में 1990 से लेकर अब तक 12 हजार से अधिक राजनीतिक कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं। क्या शांति प्रक्रिया या राजनीतिक प्रक्रिया बंद हुई, आगे भी नहीं होगी। कश्मीर के लोग जानते हैं कि इसके पीछे कौन सी राजनीतिक ताकतें लगी हुई हैं। ये तय है कि वे लोग अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होंगे।
पाकिस्तान को उसके बुरे कर्मों का मिले जवाब
कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) कहते हैं कि पाकिस्तान को सबक सिखाने का अब सही मौका है। सौ सुनार की और एक लुहार की, इस तर्ज पर चोट की जरूरत है। आतंकियों को खत्म करने के लिए बार-बार सर्जीकल स्ट्राइक की जाए। अभी तक पाकिस्तान, पुलवामा की घटना से मना कर रहा था, लेकिन अब उनके मंत्री ने ही सदन में पोल खोल कर रख दी है। इस मामले को तुरंत संयुक्त राष्ट्र संघ में ले जाया जाए। पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित कराया जाए।
राजनीतिक हत्याएं एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा होती हैं। पाकिस्तान की इस साजिश में कश्मीर के कुछ नेता भी शामिल हैं। जो भी शांति व अमन की बात करता है, उसे मार दिया जाता है। इन लोगों का प्रयास है कि किसी भी तरह से कश्मीर में इनके अलावा दूसरे किसी व्यक्ति को आवाज बुलंद करने का मौका न मिले। पीडीपी का नेता आतंकियों द्वारा नहीं मारा जाता। हुर्रियत वाले भी नहीं मारे जाते।
कैप्टन अनिल के अनुसार, राजनीतिक हत्याओं को रोकना है तो उसके लिए पाकिस्तान को सबक सिखाना होगा। यहां सरकार को दोतरफा कार्रवाई करनी चाहिए। एक, पाकिस्तान में स्थित आतंकी कैंपों पर सर्जीकल स्ट्राइक की जाए और दूसरा, अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसे आतंकी राष्ट्र घोषित कराया जाए।