फ्लैग मीटिंग में गोलाबारी न करने के अपने वादे से एकबार फिर पाकिस्तान मुकर गया। बुधवार की सुबह जीरो लाइन के पास खेतों में फसल की कटाई करवाने के बाद देर शाम पाकिस्तान ने गोलाबारी शुरू कर दी।
हालांकि इससे भारतीय क्षेत्र में किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन किसानों में यह डर समा गया कि बृहस्पतिवार की सुबह वे खेतों में जा सकेंगे या नहीं।
उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फ्लैग मीटिंग हुई थी जिसमें सीजफायर का उल्लंघन न करने का वादा किया गया था।
मिली जानकारी के अनुसार बुधवार की शाम लगभग 7.45 बजे पाकिस्तान ने गांव बद्दवाल और गिगड़याल स्थित संगम और शक्ति टाली नामक अग्रिम भारतीय चौकियों को निशाना बनाते हुए गोलाबारी की। जिसका भारतीय जवानों ने भी करारा जवाब दिया।
इससे पहले सीमा पर हालात सुधरते ही किसान फसल समेटने में जुट गए हैं। धान की कटाई जोरों पर हुई। दोनों देशों की फ्लैग मीटिंग के बाद किसानों को उम्मीद है कि वह अपनी फसल को घर ले जा सकेंगे।
आरएस पुरा सेक्टर के सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों को सीमा सुरक्षा बलों ने बुधवार को जीरो लाइन के पास खेतों पर जाने की अनुमति दी, जिसके बाद बड़ी संख्या में किसान खेतों पर दिखाई दिए।
अब भी बना हुआ है गोलाबारी का भय
पाक गोलाबारी के दौरान सुचेतगढ़, अब्दुल्लियां, कोराटाना खुर्द, लाईया, हंसू चक्क आदि गांवों के किसान गांव छोड़कर 12 दिन तक सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए थे।
वापस लौटे किसान फसल की कटाई जरूर कर रहे हैं, लेकिन गोलाबारी का भय अब भी बना हुआ है। सीमांत गांव के लोगों का कहना है कि पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता लेकिन सुरक्षा बलों द्वारा किसानों को तारबंदी के पास धान काटने की अनुमति देने से भरोसा बढ़ा है।