जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने परोक्ष रूप से नरेंद्र मोदी तथा भाजपा को चुनौती देते हुए कहा है कि राज्य से संविधान की धारा 370 को हटाने के लिए मेरी लाश से गुजरना होगा।
उन्होंने कहा है कि इस धारा को हटाने की बात करने वाले लोग जम्मू-कश्मीर के भारत से रिश्तों को कमजोर करना चाहते हैं।
उमर बनिहाल-काजीगुंड रेललाइन के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तथा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की उपस्थिति में यह बात कही।
उमर ने नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना कहा कि कुछ नेता धारा 370 को हटाने की बात कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ये लोग हमारी जमीन पर आते हैं और इस तरह के बयान देकर सियासत करते हैं। उमर ने पूछा कि जब उनकी पार्टी (भाजपा) साढ़े छह साल केंद्र में सत्ता में तब उन्होंने ये बातें क्यों नहीं की।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि धारा 370 को हटाने की बात करने वाले जम्मू-कश्मीर और भारत के रिश्ते को कमजोर करना चाहते हैं। ऐसा वे मेरी लाश के ऊपर चलकर ही कर पाएंगे।
उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते नरेंद्र मोदी ने धारा 370 के संबंध में बयान दिया था। उमर ने इस बयान को राज्य के सियासी संदर्भ में मंच से उठाकर उपस्थित जन समूह की जमकर तालियां बटोरी, लेकिन कांग्रेसी नेताओं ने इस पर पूरी तरह चुप्पी साधे रखी।
उमर ने कहा कि कांग्रेस के साथ हमारे कुछ राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर तथा भारत के रिश्तों के मुद्दे पर हम एक हैं।
क्या है धारा 370
संविधान की धारा 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करती है।
इस धारा के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश और संचार मामले में कानून बनाने का अधिकार है, लेकिन किसी अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए।
इस धारा की वजह से जम्मू-कश्मीर पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती। राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है। धारा 370 में दूसरे राज्यों के लोगों के जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने पर रोक लगाई गई है।
यही नहीं, संविधान की धारा 360 भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती। इस धारा में देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है।